
भोपाल में औद्योगिक इकाइयों की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए नगर निगम वैकल्पिक जल स्रोतों पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ किए गए पानी का इस्तेमाल फैक्ट्रियों में कराने की योजना सामने आई है। इसका उद्देश्य औद्योगिक जरूरतों के लिए पीने योग्य पानी पर निर्भरता कम करना और शहर में पानी के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
सीवेज के पानी को ट्रीट कर किया जाएगा इस्तेमाल
नगर निगम की योजना के तहत शहर से निकलने वाले सीवेज को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP में उपचारित किया जाएगा। ट्रीटमेंट के बाद प्राप्त पानी का इस्तेमाल ऐसे औद्योगिक कामों में किया जा सकता है, जहां पीने योग्य पानी की जरूरत नहीं होती।
इससे एक तरफ सीवेज के सुरक्षित निपटारे में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों के लिए वैकल्पिक पानी उपलब्ध होगा। राष्ट्रीय स्तर पर भी उपचारित अपशिष्ट जल के औद्योगिक और गैर-पेय उपयोग को बढ़ावा देने की नीति पर जोर दिया गया है।
भोपाल में बढ़ाई जा रही सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता
भोपाल में अमृत 2.0 के तहत सीवेज नेटवर्क और ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। भानपुर खंती के पास पातरा नाले पर 60 MLD क्षमता का STP बनाया जा रहा है। परियोजना में करीब 273 किलोमीटर सीवेज लाइन और कई ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं। उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल की दिशा में यह व्यवस्था अहम मानी जा रही है।
नगर निगम पहले से भी ट्रीटेड सीवेज पानी का इस्तेमाल पार्कों, सड़क किनारे हरियाली और हॉर्टिकल्चर जैसे कार्यों में करने पर जोर देता रहा है। इससे साफ है कि शहर में सीवेज को केवल कचरे के रूप में देखने के बजाय उसे दोबारा उपयोग योग्य संसाधन बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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बड़े तालाब पर भी कम होगा दबाव
भोपाल में औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। बांदीखेड़ी स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के लिए बड़े तालाब से रोजाना 2 MLD पानी देने की योजना पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि उद्योगों के लिए वैकल्पिक जल स्रोतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ऐसे में ट्रीटेड सीवेज पानी का औद्योगिक उपयोग बढ़ने से भविष्य में पेयजल स्रोतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसके लिए पानी की गुणवत्ता, नियमित ट्रीटमेंट और निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
पानी बचाने के साथ प्रदूषण रोकने पर जोर
सीवेज के उपचार के बाद उसका दोबारा इस्तेमाल जल संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे नालों और जल स्रोतों में अनुपचारित सीवेज जाने की समस्या भी कम की जा सकती है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण से जुड़े मामलों में भी नगर निगमों को अनुपचारित सीवेज के खुले में बहाव को रोकने और उचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल में ट्रीटेड सीवेज पानी को फैक्ट्रियों तक पहुंचाने की योजना शहर के जल प्रबंधन में बदलाव ला सकती है। अगर उपचारित पानी की गुणवत्ता और सप्लाई व्यवस्था लगातार मानकों के अनुरूप रहती है, तो इससे उद्योगों के साथ शहर के जल स्रोतों पर भी दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
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