झोपड़ी में जलता हौसले का दीपक: मजदूर के बेटे अभिजीत ने 465 अंक हासिल कर MBBS की ओर बढ़ाया कदम

बीना/ मनीष कुमार चौबे: सपनों को पूरा करने के लिए महंगी कोचिंग, बड़े शहर और आधुनिक सुविधाएं ही जरूरी नहीं होतीं। मजबूत इरादे और लगातार मेहनत के दम पर सीमित संसाधनों में भी सफलता हासिल की जा सकती है। सागर जिले की बीना तहसील के अभिजीत अहिरवार ने अपनी मेहनत से इस बात को साबित कर दिखाया है। मजदूर के बेटे अभिजीत ने दो कमरों के कच्चे मकान में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई और सेल्फ स्टडी के दम पर NEET UG परीक्षा में 720 में से 465 अंक हासिल किए हैं।

बिना महंगी कोचिंग के हासिल की सफलता

अभिजीत अहिरवार अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। उनके पिता इंद्रराज अहिरवार मजदूरी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित है। ऐसे में इंदौर, कोटा या दिल्ली जैसे शहरों में जाकर लाखों रुपये खर्च कर कोचिंग करना परिवार के लिए संभव नहीं था। अभिजीत ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपनी पढ़ाई का माध्यम बनाया।

उन्होंने करीब दो वर्षों तक ऑनलाइन क्लासेस, डिजिटल लेक्चर, टेस्ट सीरीज और नियमित सेल्फ स्टडी के जरिए NEET की तैयारी की।

दो कमरों का कच्चा मकान बना पढ़ाई का केंद्र

अभिजीत का परिवार दो कमरों के साधारण कच्चे मकान में रहता है। सीमित संसाधनों और पढ़ाई के लिए अलग से किसी आधुनिक सुविधा के अभाव के बावजूद उन्होंने अपने घर को ही तैयारी का केंद्र बना लिया।

इंटरनेट की समस्या, आर्थिक चुनौतियां और भविष्य को लेकर दबाव जैसी परेशानियों के बीच भी अभिजीत अपने लक्ष्य पर डटे रहे। उनकी मेहनत का परिणाम NEET UG परीक्षा के परिणाम के रूप में सामने आया।

720 में से 465 अंक, MBBS में प्रवेश की उम्मीद

अभिजीत ने NEET UG परीक्षा में 720 में से 465 अंक हासिल किए हैं। SC वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में उनके इस स्कोर से MBBS सीट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि कॉलेज का आधिकारिक सीट अलॉटमेंट अभी होना बाकी है, लेकिन उनकी सफलता ने बीना और सागर जिले का नाम रोशन किया है।

पढ़ाई में पहले भी रहा है अच्छा प्रदर्शन

अभिजीत ने वर्ष 2022 में 10वीं कक्षा में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में 12वीं कक्षा में उन्होंने 83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पढ़ाई के प्रति उनकी निरंतरता और मेहनत ने उन्हें NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता दिलाई।

परिवार ने भी दिया पूरा सहयोग

अभिजीत के पिता इंद्रराज अहिरवार 8वीं तक पढ़े हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं और उन्होंने 5वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। उनके बड़े भाई भोपाल से एग्रीकल्चर में B.Sc. कर रहे हैं। वहीं उनकी बहन एक निजी अस्पताल में नौकरी कर परिवार की आर्थिक मदद करती हैं।

परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद सभी ने अभिजीत के सपने को पूरा करने में उसका साथ दिया।

अभिजीत की सफलता बनी युवाओं के लिए मिसाल

अभिजीत अहिरवार की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित किया कि सफलता के लिए महंगी कोचिंग से ज्यादा जरूरी लक्ष्य के प्रति समर्पण, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास है।

यह भी पढ़ें:पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा बयान: आरोपियों के खिलाफ सख्त कानून की तैयारी

दो कमरों के कच्चे मकान से NEET की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले अभिजीत अब डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ चुके हैं। उनके परिवार और क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि वे जल्द ही MBBS की पढ़ाई शुरू कर अपने सपने को पूरा करेंगे।

  • Bina Student Abhijeet Cracks NEET Without Expensive Coaching, Scores 465 Marks
Manisha Gupta

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