
राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की अजनार नदी को साफ करने के लिए करीब आठ महीने तक अकेले मेहनत करने वाले 20 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ Bittu Tabahi एक बार फिर चर्चा में हैं। लंबे अभियान के बाद नदी के किनारों पर दोबारा प्लास्टिक और कचरा देखकर उन्हें निराशा हुई। उन्होंने 13 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें नदी के आसपास कचरा बिखरा दिखाई दे रहा है।
आठ महीने की मेहनत के बाद फिर दिखा कचरा
बिट्टू तबाही ने राजगढ़ के ब्यावरा क्षेत्र में प्रदूषित अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। उन्होंने बिना किसी विशेष उपकरण के लंबे समय तक नदी से कचरा निकालने का काम किया। इस दौरान उन्होंने बड़ी मात्रा में कचरा हटाया और नदी को साफ करने की कोशिश की।
हालांकि, अब नदी के किनारों पर प्लास्टिक की थैलियां और अन्य कचरा दोबारा नजर आने लगा है। यह स्थिति उनके लिए बड़ा झटका है, क्योंकि जिस जगह को साफ करने में उन्होंने महीनों लगाए, वहां फिर से वही समस्या दिखाई दे रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी निराशा भी जाहिर की।
नदी में उतरकर फिर शुरू की सफाई
कचरा वापस आने के बावजूद बिट्टू ने अपना अभियान रोकने के बजाय फिर सफाई शुरू कर दी। सामने आए वीडियो में वह नदी में उतरकर प्लास्टिक की थैलियां और दूसरे कचरे को बाहर निकालते नजर आए।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिट्टू को तैरना भी नहीं आता, इसके बावजूद उन्होंने नदी में उतरकर कचरा निकालने की कोशिश की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से यह भी सुझाव मांगा कि बड़ी मात्रा में जमा कचरे को अधिक प्रभावी तरीके से कैसे हटाया जा सकता है। उनकी इस कोशिश ने एक बार फिर नदी सफाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। सवाल सिर्फ नदी की सफाई का नहीं, बल्कि सफाई के बाद उसे दोबारा गंदा होने से रोकने का भी है।
यह भी पढ़े: Navratri 2026 चौथा दिन, आज मां कूष्मांडा की पूजा, जानें भोग, मंत्र और शुभ मुहूर्त
Bittu Tabahi की मुहिम ने फिर उठाया बड़ा सवाल
अजनार नदी में दोबारा कचरा दिखाई देना यह बताता है कि केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। जब तक नदी में कचरा फेंकने पर रोक, नियमित निगरानी और बेहतर कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं मजबूत नहीं होंगी, तब तक ऐसे प्रयासों का असर लंबे समय तक बनाए रखना चुनौती बना रहेगा।
बिट्टू तबाही का अभियान इसी वजह से चर्चा में आया था कि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर नदी की सफाई की जिम्मेदारी उठाई। अब दोबारा कचरा मिलने के बाद उनका संघर्ष केवल सफाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नागरिक व्यवहार से भी जुड़ गया है।
नदी बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
अजनार नदी की मौजूदा स्थिति से यह सवाल भी सामने आता है कि किसी एक व्यक्ति की मेहनत से साफ किए गए जलस्रोत को लंबे समय तक स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी किसकी है। नदी में लगातार कचरा पहुंचता रहा तो सफाई अभियान बार-बार दोहराना पड़ेगा।
बिट्टू तबाही की कहानी युवाओं की पर्यावरण के प्रति भागीदारी का उदाहरण जरूर है, लेकिन नदी संरक्षण के लिए स्थानीय प्रशासन, नागरिकों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भूमिका भी जरूरी है। नदी में प्लास्टिक और दूसरे कचरे का निस्तारण रोकना ही सफाई को स्थायी बनाने की दिशा में सबसे अहम कदम हो सकता है।
अजनार नदी में आठ महीने की मेहनत के बाद फिर कचरा दिखाई देना पर्यावरण संरक्षण की बड़ी चुनौती को सामने लाता है। बिट्टू तबाही ने दोबारा नदी में उतरकर सफाई शुरू कर दी है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए केवल सफाई नहीं, बल्कि कचरा फेंकने पर रोक और लगातार निगरानी भी जरूरी है।
- bittu-tabahi-ajnar-river-cleaning-garbage-rajgarh-mp








