
सार
राजू सूरसिंह राठौड़ | बुरहानपुर में ऋषि पंचमी के अवसर पर करीब 400 साल पुरानी लोक आस्था से जुड़ा अडबाल पंचमी का आयोजन हुआ। ग्राम उखड़गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर उतावली नदी के पार स्थित प्राचीन अडबाल नाग मंदिर में हजारों श्रद्धालु जंगल के रास्ते पहुंचे। भक्तों ने नाग देवता की बांबियों पर दूध, पानी, नारियल और मैदे-घी से बनी पूरियां चढ़ाकर मन्नतें मांगीं। वहीं बारिश के बीच उतावली नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।
विस्तार
बुरहानपुर में ऋषि पंचमी का पर्व एक अनूठी लोक परंपरा और गहरी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर ग्राम उखड़गांव में उतावली नदी के पार स्थित प्राचीन अडबाल नाग मंदिर में पंचमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे। स्थानीय लोगों के बीच यह आयोजन ‘अडबाल पंचमी’ के नाम से प्रसिद्ध है और इसकी परंपरा करीब 400 साल पुरानी बताई जाती है।
पुजारी अनिल चौधरी के अनुसार, अडबाल पंचमी की धार्मिक गतिविधियां चतुर्थी की रात से ही शुरू हो जाती हैं। श्रद्धालु तड़के अंधेरे में अपने घरों से निकलते हैं और जंगल के रास्ते से मंदिर तक पहुंचते हैं। कई भक्त टोकरी में पूजा सामग्री लेकर पहुंचते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु विशेष बांस की टोकरी में मैदे और घी से तैयार पूरियां लेकर नाग देवता को अर्पित करते हैं।
मंदिर परिसर में चिकनी मिट्टी से बनी दो विशाल बांबियों की पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार नाग देवता वर्षभर इन बांबियों में निवास करते हैं और पंचमी के दिन श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। भक्त यहां दूध, पानी और नारियल के साथ मैदे-घी से बनी पूरियां अर्पित कर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
भारत भूषण देवकर और गणेश सेवाधारी के मुताबिक, यहां मन्नत पूरी होने के बाद नाग देवता का जोड़ा और चांदी का छत्र चढ़ाने की भी परंपरा है। नागमंत्री और पुजारियों की ओर से धार्मिक नियमों के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना कराई जाती है। इस आयोजन में बच्चों से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन जंगल के रास्ते को पार कर मंदिर पहुंचते हैं।
श्रद्धालु मोहन रायलीवाला ने कहा कि अडबाल पंचमी सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बुरहानपुर की सदियों पुरानी लोक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। श्रद्धालु आज भी उसी विश्वास के साथ अंधेरे में घरों से निकलकर जंगल का रास्ता तय करते हैं और नाग देवता की बांबी पर पहुंचकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
हालांकि, श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या और बारिश के बीच उतावली नदी के जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी है। आयोजन के दौरान नदी और जंगल के रास्ते से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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