
बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: समान नागरिक संहिता को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने मंगलवार को बुरहानपुर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और सभी समुदायों से व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लेने की मांग की।
व्यक्तिगत कानून और धार्मिक रीति-रिवाज
ज्ञापन में AIMIM ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास कर रही है और इस संबंध में समिति गठन की प्रक्रिया भी सामने आई है। संगठन का कहना है कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है, जहां अलग-अलग समुदायों के अपने व्यक्तिगत कानून और धार्मिक रीति-रिवाज हैं।
सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रभावित
ज्ञापन में कहा गया कि समान नागरिक संहिता लागू होने से देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार को सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा
AIMIM प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि यूसीसी से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले सभी समुदायों, धार्मिक संगठनों और संबंधित पक्षों से संवाद सुनिश्चित किया जाए, ताकि सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो सके।
कार्यकर्ता मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान AIMIM के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन ने कहा कि वह संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहा है।
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