1.48 करोड़ की रेन वॉटर हार्वेस्टिंग परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप: ग्राउंड जीरो पहुंच एडवोकेट प्रियांक सिंह ने खोला मोर्चा

बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: नगर निगम बुरहानपुर की इंदिरा कॉलोनी में 1.48 करोड़ रुपये की रेन वॉटर हार्वेस्टिंग परियोजना एक बार फिर विवादों में आ गई है। बुरहानपुर मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एडवोकेट ठाकुर प्रियांक सिंह ने परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जल संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये की परियोजना में गुणवत्ता से समझौता किया गया है और कागजों में काम पूरा दिखाकर भुगतान की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर नगर निगम का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

विस्तार:

मंगलवार को एडवोकेट ठाकुर प्रियांक सिंह इंदिरा कॉलोनी स्थित परियोजना स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौके से फोटो और वीडियो भी जुटाए तथा मीडिया के सामने परियोजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

उनका आरोप है कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित ठेकेदार की मिलीभगत से परियोजना में वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर के ठेकेदार दुष्यंत ठाकुर को दिए गए इस कार्य में धरातल पर वास्तविक प्रगति बेहद कम दिखाई दे रही है, जबकि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

घटिया निर्माण सामग्री और सुरक्षा में लापरवाही के आरोप

निरीक्षण के दौरान एडवोकेट प्रियांक सिंह ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर खुदाई के बाद गड्ढों को बिना ढके और बिना सुरक्षा इंतजाम के छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि खुले गड्ढों के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और बच्चों के साथ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी पक्षपात के आरोप लगाए गए। एडवोकेट प्रियांक सिंह का कहना है कि कार्रवाई के दौरान केवल कुछ लोगों के अतिक्रमण हटाए गए, जबकि प्रभावशाली लोगों को छोड़ दिया गया। उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

5 हजार मकानों और 10 उद्यानों के लक्ष्य पर सवाल

परियोजना के तहत लगभग 5 हजार मकानों को सोकपिट से जोड़ने और 10 उद्यानों में रिचार्ज वेल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन एडवोकेट प्रियांक सिंह का आरोप है कि मौके पर कार्य लक्ष्य के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहा, जबकि दस्तावेजों में परियोजना को लगभग पूर्ण दर्शाकर भुगतान की तैयारी की जा रही है।

उच्च स्तरीय जांच और भुगतान रोकने की मांग

एडवोकेट ठाकुर प्रियांक सिंह ने पूरे 1.48 करोड़ रुपये की परियोजना की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक ठेकेदार का भुगतान तत्काल रोका जाए। साथ ही माप पुस्तिका  का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उसका लाइसेंस निरस्त किया जाए। उन्होंने परियोजना में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की।

नगर निगम के जवाब का इंतजार

फिलहाल इस मामले में नगर निगम प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शहर की महत्वपूर्ण जल संरक्षण परियोजना में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला साबित हो सकता है। वहीं, निगम का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यह भी पढ़े: दिग्विजय सिंह ने दतिया की जनता का जताया आभार, नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह को दी बधाई

 

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Manisha Gupta

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