बुरहानपुर: स्कूलों में अनिवार्य हो ‘सिविक सेंस’, पालक महासंघ ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बुरहानपुर/राजू राठोड: आज बुरहानपुर में “पालक महासंघ, बुरहानपुर” ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रम में सिविक सेंस (नागरिक शिष्टाचार) को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की है। महासंघ का मानना है कि आज देश में बढ़ता भ्रष्टाचार, मिलावटखोरी, प्रदूषण और अनुशासनहीनता जैसी समस्याओं की मूल वजह नागरिकों में सिविक सेंस की कमी है।

महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली में अकादमिक ज्ञान पर जोर है, लेकिन अच्छे नागरिक बनने की शिक्षा का अभाव है। अगर बचपन से ही विद्यार्थियों में ईमानदारी, जिम्मेदारी, अनुशासन और समाज के प्रति कर्तव्यबोध विकसित किया जाए, तो इन समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजेश भगत और संस्था अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनी ने कहा कि सिविक सेंस को शिक्षा में शामिल करने से समाज में नैतिकता और जिम्मेदारी बढ़ेगी।

इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी, मिलावटखोरी पर रोक लगेगी, प्रदूषण घटेगा और कानूनों के पालन की प्रवृत्ति मजबूत होगी। जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने से गरीबी और सामाजिक असंतुलन भी कम होगा। ये वरिष्ठ मार्गदर्शक राजीव खेडकर ने इसे समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए प्रशासन से अनुरोध किया कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाए और इसे विद्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल देश को स्वच्छ, ईमानदार और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर अताउल्ला खान, रियाज उल हक़ अंसारी, नंदकुमार वाणे, डॉ युसुफ खान, राजकुमार वचछानी, राजेश भगत और संगठन के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

  • burhanpur-schools-civic-sense-mandatory-parents-federation-submits-memorandum
Rashel Kachwah Rajput

Rashel Kachwah Rajput

14+ वर्षों का अनुभव। हर दिन, पल-पल की खबरों के साथ। निष्पक्ष व भरोसेमंद रिपोर्टिंग, हर खबर की गहराई तक पहुँचने का प्रयास। सच्ची पत्रकारिता, आपके भरोसे के साथ।

Related Posts

जर्मनी का धमाकेदार आगाज, वर्ल्ड कप में कुरासाओ को 7-1 से रौंदा

फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में जर्मनी ने अपने अभियान…

आगे पढ़ें
फीफा वर्ल्ड कप से जर्सी बाजार में बूम, 15 करोड़ यूनिट बिक्री का अनुमान

फीफा वर्ल्ड कप केवल खेल का सबसे बड़ा मंच…

आगे पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

‘राष्ट्रवाद’ का नया शोरूम: पोर्ट गया, एयरपोर्ट गया, सैनिक स्कूल गया… क्या अब सेना भी ‘साहब के मित्र’ की होगी?

‘राष्ट्रवाद’ का नया शोरूम: पोर्ट गया, एयरपोर्ट गया, सैनिक स्कूल गया… क्या अब सेना भी ‘साहब के मित्र’ की होगी?

राष्ट्रपति भवन से लोकतंत्र का अपमान? 2 करोड़ जनता के दूतों को समय नहीं, आदिवासी महिला मीनाक्षी नटराजन का रास्ता रोकने के पीछे क्या है BJP की मंशा?

राष्ट्रपति भवन से लोकतंत्र का अपमान? 2 करोड़ जनता के दूतों को समय नहीं, आदिवासी महिला मीनाक्षी नटराजन का रास्ता रोकने के पीछे क्या है BJP की मंशा?

लोकतंत्र और न्यायपालिका पर उठते सवाल, दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी भूचाल, क्या खतरे में है जनता का जनादेश?

लोकतंत्र और न्यायपालिका पर उठते सवाल, दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी भूचाल, क्या खतरे में है जनता का जनादेश?

डिजिटल सम्मोहन, रील्स के दौर में खोते रिश्ते और बिखरता हुआ परिवार

डिजिटल सम्मोहन, रील्स के दौर में खोते रिश्ते और बिखरता हुआ परिवार

शिक्षा का ‘डेथ वारंट’: सरकारी स्कूलों का जनाज़ा, प्राइवेट माफिया का कब्ज़ा! क्या मुफ्त राशन के बदले बच्चों का भविष्य बेच रही है जनता?

शिक्षा का ‘डेथ वारंट’: सरकारी स्कूलों का जनाज़ा, प्राइवेट माफिया का कब्ज़ा! क्या मुफ्त राशन के बदले बच्चों का भविष्य बेच रही है जनता?