
भोपाल: भोपाल की बावड़िया कलां में रहने वाली एक 64 वर्षीय महिला अरुणा चिंचोलकर से साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी की घटना को नवंबर 2025 में अंजाम दिया था, जिससे वे साइबर अपराधियों द्वारा रची गई “डिजिटल गिरफ्तारी” धोखाधड़ी का शिकार हो गईं, जिससे उन्हें 25.65 लाख रुपये का भरी नुक्सान झेलना पड़ा। यह मामला नवंबर 2025 का है, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच CBI द्वारा की जा रही है।
नवंबर 2025 में दर्ज इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं जब सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए CBI को हस्तक्षेप करने का आदेश दिया। इसकी शुरुआत भोपाल साइबर पुलिस ने की थी, लेकिन अब यह एक राष्ट्रीय लेवल पर ऐतिहासिक जांच का रूप ले चुका है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी विभाग के अधिकारियों का भेष धारण कर महिला से व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क किया। उन्होंने “डिजिटल गिरफ्तारी” के जरिए महिला को मनोवैज्ञानिक रूप से अलग-थलग और नियंत्रित कर दिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जालसाजों ने भय का वातावरण बनाकर पीड़िता को यह विश्वास दिलाया कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में जांच के घेरे में है। इस दबाव के चलते, उसे कानूनी सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताकर 25.65 लाख रुपये हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया गया।
जांच की दिशा और संभावनाएं
CBI की FIR से यह जाहिर होता है, कि इस तरह के शातिर डिजिटल ठगी अब स्थानीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रभाव वाले संगठित आपराधिक अभियानों के रूप में देखे जा रहे हैं। CBI जांचकर्ता मानते हैं कि यह तो बस हिमशैल का एक छोटा सा हिस्सा है। इस “डिजिटल गिरफ्तारी” मॉडल साइबर धोखाधड़ी का एक खतरनाक रूप बनकर उभर रहा है।
अब पुलिस की जांच का ध्यान इस ऑपरेशन के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने पर केंद्रित होगा, जिसमें अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संबंधों की संभावना, डिजिटल मनी ट्रेल और फर्जी पहचान के उपयोग की जानकारी शामिल है।
- cbi-fir-bhopa-digital-arrest-fraud-supreme-court-directive









