
प्रदेश सरकार ने लोगों के शासकीय काम जल्द पूरे करने के मकसद से एक अभियान शुरू किया है। इसी अभियान की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने पूछा कि अभियान की जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी गई है। बड़े साहब ने जैसे ही एक बड़े विभाग के पीएस का नाम लिया, मुख्यमंत्री ने तुरंत सवाल किया—“इनसे हो पाएगा क्या?” इसके बाद मुख्यमंत्री ने दो एसीएस को अभियान की जिम्मेदारी सौंपते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब आप इसे संभाल लें।
दरअसल, पीएस को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी की एक वजह पहले से ही सामने आ चुकी है। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री ने गांव के लोगों को सौगात देते हुए एक योजना की शुरुआत की थी। लेकिन करीब दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पीएस उस योजना को जमीन पर लागू नहीं करा सके। इस वजह से योजना के क्रियान्वयन में देरी हुई और मुख्यमंत्री की नाराजगी की चर्चा सामने आई। इसी पृष्ठभूमि में अभियान की जिम्मेदारी को लेकर हुई बैठक में पीएस का नाम सामने आया।
इसके बाद दो एसीएस को अभियान की जिम्मेदारी सौंप दी गई। मुख्यमंत्री की ओर से “इनसे हो पाएगा क्या?” सवाल किए जाने और फिर जिम्मेदारी दो वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। पीएस की पहले की योजना को जमीन पर लागू नहीं करा पाने की स्थिति और अब नए अभियान की जिम्मेदारी दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे जाने को मुख्यमंत्री के भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है।
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