
एक मंत्री जी की कार्यशैली से उनका पूरा विभाग परेशान बताया जा रहा है। हालात यह हैं कि मंत्री जी के पास कोई फाइल जाती है तो या तो उस पर “चर्चा” लिखकर वापस भेज दी जाती है या फिर फाइल को अपने पास ही पेंडिंग रख लिया जाता है। धीरे-धीरे मंत्री जी के पास फाइलों का अच्छा-खासा अंबार लग गया है। विभाग में फाइलों के लंबित रहने के साथ-साथ मंत्री जी की लगातार बैठकों को लेकर भी अधिकारी परेशान बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, मंत्री जी को बैठकें लेने का भी खासा शौक है। कई बार बैठक का सिलसिला देर रात 12 बजे तक चलता रहता है। स्थिति यह है कि कुछ अफसर बीच में ही बैठक छोड़कर निकल जाते हैं, लेकिन मंत्री जी की बैठक जारी रहती है। इतनी देर तक बैठक चलने के बावजूद अधिकारियों के सामने काम के निपटारे को लेकर स्थिति आसान नहीं हो रही है। फाइलें लगातार लंबित हैं और बैठकें अपने लंबे समय के लिए चर्चा में हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इतनी लंबी बैठकों के बावजूद ठोस नतीजा निकलने के बजाय उनमें ज्यादातर ज्ञान की गंगा ही बहती रहती है। नतीजा यह कि अफसर देर रात तक बैठकों में उलझे रहते हैं और फाइलों का ढेर अपनी जगह बना रहता है। मंत्री जी की इस कार्यशैली को लेकर पूरा विभाग परेशान बताया जा रहा है और फाइलों के लगातार पेंडिंग रहने की स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
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