
डबरा/ भरत रावत: ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र में नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। टेल क्षेत्र के खेतों तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत पर विधायक सुरेश राजे ने बेरूहेड पहुंचकर नहर का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया।
डबरा क्षेत्र को धान की अच्छी पैदावार के कारण “धान का कटोरा” कहा जाता है। ऐसे समय में जब खेतों में धान की फसल को पर्याप्त पानी की जरूरत है, नहरों में पानी की कमी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। खासकर नहर के टेल पोर्शन तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों को फसल प्रभावित होने की चिंता सता रही है।
इसी समस्या की जानकारी मिलने पर मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक सुरेश राजे बेरूहेड पहुंचे। उन्होंने मौके पर नहर का निरीक्षण कर पानी की स्थिति देखी और किसानों से सीधे बातचीत की। किसानों ने विधायक को बताया कि नहर में पानी की मात्रा कम होने के कारण टेल क्षेत्र के खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
हर्षी डेम से पानी छोड़ने की मांग
किसानों ने बताया कि यदि हर्षी डेम से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए तो नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाया जा सकता है। इससे उन किसानों को राहत मिल सकती है, जिनके खेत अभी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान विधायक सुरेश राजे ने भी नहर में पानी की कम मात्रा का जायजा लिया। उन्होंने किसानों की समस्याएं और उनके सुझाव सुने। इसके बाद सिंचाई से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई के लिए अवगत कराया।
धान की फसल बचाने पर जोर
विधायक सुरेश राजे ने कहा कि क्षेत्र के किसानों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और डबरा में धान प्रमुख फसलों में शामिल है। ऐसे में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना जरूरी है। उन्होंने किसानों की समस्या के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने की बात कही, ताकि पानी की कमी के कारण धान की फसल को नुकसान न हो।
विधायक ने बेहतर बारिश की भी कामना की। उनका कहना है कि पर्याप्त वर्षा होने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की समस्या में राहत मिल सकती है।
नहर में पानी की कमी को लेकर किसानों की चिंता के बीच अब उनकी नजर प्रशासन और सिंचाई विभाग की कार्रवाई पर है। किसानों की मांग है कि नहर में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए, जिससे टेल क्षेत्र तक भी सिंचाई का पानी पहुंच सके और धान की फसल को समय पर पानी मिल सके।
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