
दमोह।आकिब खान| जबलपुर नाका चौकी क्षेत्र में माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों से हुई लूट का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि लूट की शिकायत दर्ज कराने वाला फरियादी ही पूरी वारदात का मास्टरमाइंड था। उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रची थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
कलेक्शन राशि से भरा बैग लूटने की शिकायत
एडिशनल एसपी सुजीत सिंह भदोरिया ने पत्रकारवार्ता में बताया कि 8 अगस्त को दमोह देहात थाना क्षेत्र के जबलपुर नाका चौकी में माइक्रोफाइनेंस कंपनी की कलेक्शन राशि लूटे जाने की सूचना मिली थी।
फरियादी घनश्याम अहिरवार, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम पिपरिया, थाना सुरखी, जिला सागर और हाल निवासी दमोह ने पुलिस को बताया था कि दो अज्ञात बाइक सवार बदमाश उसकी साथी जूही चंदेल के हाथ से कलेक्शन राशि से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। बैग में करीब 1 लाख 23 हजार 800 रुपये होने की जानकारी दी गई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे करीब 50 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके अलावा कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया।
जांच में फरियादी की भूमिका पर हुआ शक
जांच के दौरान पुलिस को फरियादी घनश्याम अहिरवार की भूमिका संदिग्ध लगी। इसके बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रचने की बात स्वीकार की।
पुलिस के अनुसार, घनश्याम ने संजय सौर, उम्र 22 वर्ष और सोहित उर्फ वीरेंद्र रजक, उम्र 18 वर्ष, दोनों निवासी ग्राम पिपरिया, थाना सुरखी, जिला सागर के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।
आरोपियों ने करीब 1 लाख 17 हजार 335 रुपये से भरा बैग लूटा था। पुलिस के मुताबिक, इसमें से लगभग 12 हजार 335 रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि शेष 1 लाख 5 हजार रुपये आरोपियों ने आपस में बांट लिए थे।
नकदी, बाइक और मोबाइल फोन बरामद
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 1 लाख 5 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल बाइक और तीन मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, बरामद सामग्री की कुल कीमत करीब 1 लाख 83 हजार रुपये है। मामले में घनश्याम अहिरवार, संजय सौर और सोहित उर्फ वीरेंद्र रजक को गिरफ्तार किया गया है।
तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सीसीटीवी और तकनीकी जांच से खुला राज
पुलिस ने इस मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज के साथ तकनीकी साक्ष्यों का भी इस्तेमाल किया। करीब 50 कैमरों के फुटेज और कॉल डिटेल के विश्लेषण के बाद पुलिस को घटनाक्रम में फरियादी की भूमिका पर संदेह हुआ।
पूछताछ के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने कथित साजिश का खुलासा किया। इस कार्रवाई में सीएसपी एचआर पांडे, देहात थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय, जबलपुर नाका चौकी प्रभारी प्रियंका पटेल और साइबर सेल की टीम का विशेष सहयोग रहा।
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी है।
पाठकों के लिए जरूरी बात: पुलिस के अनुसार इस मामले में शिकायतकर्ता ही कथित तौर पर लूट की साजिश में शामिल पाया गया। बरामदगी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में न्यायालय की आगे की प्रक्रिया के बाद ही अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
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