
हिंदी सिनेमा के जगत में देशभक्ति गीतों की अपनी अलग पहचान रही है। आजादी, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण को पर्दे पर उतारने वाले कई गीत कालजयी बने। इन्हीं में 1948 में आई फिल्म ‘शहीद’ का गीत ‘वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हो’ खास स्थान रखता है। फिल्म में दिलीप कुमार और कामिनी कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।
दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था गीत
‘शहीद’ का निर्देशन रमेश सहगल ने किया था और फिल्म की कहानी भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। दिलीप कुमार ने फिल्म में राम नाम के युवा स्वतंत्रता सेनानी का किरदार निभाया था। कहानी में देश के लिए संघर्ष और व्यक्तिगत रिश्तों के बीच नायक की जद्दोजहद को दिखाया गया था।
मोहम्मद रफी की आवाज ने गीत को बनाया यादगार
‘वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हो’ को मोहम्मद रफी और खान मस्ताना ने अपनी आवाज दी थी। गीत का संगीत महान संगीतकार गुलाम हैदर ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल राजा मेहदी अली खान और क़मर जलालाबादी से जुड़े थे।
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इस गीत में देश के लिए कुर्बानी देने वाले युवाओं की भावना को प्रभावी तरीके से सामने रखा गया था। यही वजह है कि यह गीत उस दौर के शुरुआती चर्चित फिल्मी देशभक्ति गीतों में गिना जाता है और बाद की फिल्मों के लिए भी एक मिसाल बना।
देशभक्ति गीतों की परंपरा में खास मुकाम
आजादी के दौर और उसके बाद हिंदी फिल्मों में देशभक्ति गीतों का सिलसिला लगातार मजबूत हुआ। ‘वतन की राह में’ जैसे गीतों ने सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देश और समाज से जुड़े भावनात्मक विषयों को भी बड़े पर्दे तक पहुंचाया।
दिलीप कुमार और मोहम्मद रफी की जोड़ी ने आगे भी कई यादगार गीत दिए। दोनों की आवाज और अभिनय का मेल हिंदी सिनेमा के इतिहास में बेहद लोकप्रिय रहा।
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