
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के बढ़ते मामलों और मानसूनी बीमारियों के खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार हरकत में आ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने सोमवार को दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। दोपहर 2 बजे होने वाली इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जिसमें दिल्ली में मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और मौसमी तथा मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की गहन समीक्षा की जाएगी।
इस बैठक में विशेष रूप से स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की स्थिति पर चर्चा होगी और स्वास्थ्य मंत्री जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने तथा आने वाले दिनों में संभावित मामलों से निपटने के लिए अस्पतालों की तैयारियों और निगरानी प्रणाली का जायजा लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं। दिल्ली में मानसून के दौरान मौसमी और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के मद्देनजर यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बीच सफदरजंग अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि वह स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इन्फ्लूएंजा और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह तैयार है और अस्पताल में आवश्यक दवाएं, उपचार सुविधाएं तथा सहायक देखभाल पूरी तरह उपलब्ध हैं।
आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली में 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले सामने आए थे, जिनमें 114 मामले H1N1 के थे, जिसके साथ ही वर्ष 2026 में दिल्ली में H1N1 मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,777 और इन्फ्लूएंजा ए के मामले बढ़कर 2,392 हो गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इस साल अब तक इन्फ्लूएंजा के कुल 2,602 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 2,392 मामले इन्फ्लूएंजा ए के और 210 मामले इन्फ्लूएंजा बी के शामिल हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 मूल रूप से इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार है, जो श्वसन संबंधी बीमारी का कारण बनता है और वर्ष 2009 की महामारी के बाद से यह मनुष्यों में फैलने वाले सामान्य मौसमी इन्फ्लूएंजा का हिस्सा बन गया है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना या बंद होना शामिल हैं, जिनसे अधिकांश लोग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ, लगातार तेज बुखार या सीने में दर्द होने पर तत्काल डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली बूंदों के जरिए फैलता है, इसलिए हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना, बीमार लोगों से दूरी बनाना और मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाना इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
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