
मध्यप्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब तस्करी रोकने की कार्रवाई के दौरान खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत हो गई। पुलिस टीम को संदिग्ध आयशर वाहन में अवैध शराब ले जाने की सूचना मिली थी। वाहन को रोकने की कोशिश के दौरान चालक ने कथित तौर पर ट्रक आगे बढ़ा दिया, जिसकी चपेट में आने से TI गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई।
शराब तस्करी की सूचना पर पुलिस ने की थी नाकाबंदी
पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा की ओर से अवैध शराब से भरा वाहन इंदौर होते हुए आगे जा रहा है। इसके बाद देवास पुलिस ने वाहन को पकड़ने के लिए कई विशेष टीमें लगाईं। खातेगांव TI दिलीप पुरी भी टीम के साथ इंदौर-बैतूल और हरदा-नेमावर मार्ग पर चेकिंग कर रहे थे। संदिग्ध आयशर वाहन मिलने पर उसे रोकने की कोशिश की गई। इसी दौरान चालक ने वाहन को डिवाइडर की ओर चढ़ाकर आगे बढ़ाया और TI उसकी चपेट में आ गए।
वाहन में मिली 200 से ज्यादा पेटी शराब
घटना के बाद पुलिस ने आयशर वाहन को जब्त कर उसकी तलाशी ली। शुरुआती जानकारी के मुताबिक वाहन में 200 से ज्यादा पेटी और करीब 1,800 लीटर अवैध शराब मिली है। शराब को वाहन के गुप्त कंपार्टमेंट में छिपाकर रखा गया था। पुलिस अब शराब के स्रोत, परिवहन और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में बरामद पेटियों की संख्या अलग बताई गई है, इसलिए अंतिम आंकड़ा पुलिस की आधिकारिक जब्ती सूची से स्पष्ट होगा।
दिलीप पुरी कौन थे?
खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी 2007 बैच के उप निरीक्षक थे। वह इंदौर के हीरानगर और चंदननगर थानों में भी सेवाएं दे चुके थे। मूल रूप से धार जिले के बरमंडल गांव के रहने वाले दिलीप पुरी का परिवार इंदौर में रहता था। उनकी मौत के बाद पुलिस विभाग और परिवार में शोक का माहौल है।
देवास में TI दिलीप पुरी की मौत ने जिले में सक्रिय अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने वाहन जब्त कर जांच शुरू कर दी है और तस्करी से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मामले में सामने आने वाले आधिकारिक जांच निष्कर्ष से ही पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ होगी।
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