
धार जिले में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने रेलवे ओवरब्रिज की सड़क एक बार फिर खराब हो गई है। नौगांव थाना क्षेत्र के पास बने इस ओवरब्रिज के एक हिस्से में डामर उखड़ने के बाद वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ओवरब्रिज को मार्च 2026 में यातायात के लिए खोला गया था। इसके बाद से सड़क के इसी हिस्से में बार-बार खराबी सामने आने की बात कही जा रही है।
सात महीने में तीन से चार बार हो चुकी मरम्मत
रिपोर्ट के अनुसार, ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से की अब तक तीन से चार बार मरम्मत की जा चुकी है। इसके बावजूद डामर के दोबारा उखड़ने से स्थायी समाधान पर सवाल उठ रहे हैं। ताजा स्थिति में इंदौर की ओर जाने वाली लेन के कुछ हिस्से में बैरिकेड लगाकर आवाजाही को सीमित किया गया है।
सड़क पर डामर के साथ कंकड़ और निर्माण सामग्री बिखरी होने से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। वाहनों के गुजरने पर धूल उड़ने से भी दृश्यता प्रभावित होने और दुर्घटना का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहली बारिश के बाद ही सामने आई थी समस्या
इस ओवरब्रिज की सड़क को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों में बताया गया था कि पहली बारिश के बाद सड़क के करीब 175 मीटर हिस्से में गड्ढे और सतह खराब होने की समस्या सामने आई थी। मरम्मत के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक, ओवरब्रिज का निर्माण करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसकी लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर है। ऐसे में इतने कम समय में सड़क की सतह बार-बार खराब होने से इसकी मजबूती और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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एक ही हिस्से में बार-बार क्यों उखड़ रहा डामर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरम्मत के बाद भी सड़क का एक ही हिस्सा बार-बार क्यों खराब हो रहा है। यदि केवल ऊपरी सतह की मरम्मत की जा रही है और उसके नीचे की तकनीकी समस्या दूर नहीं की जा रही, तो भविष्य में भी ऐसी स्थिति सामने आ सकती है।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, डामर की गुणवत्ता, सतह की तैयारी और जल निकासी की व्यवस्था मानकों के अनुरूप है या नहीं। हालांकि इन सवालों का अंतिम जवाब तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
वाहन चालकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
इंदौर-अहमदाबाद मार्ग मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस मार्ग पर भारी वाहनों के साथ बड़ी संख्या में यात्री वाहन भी चलते हैं। ऐसे में ओवरब्रिज की सड़क खराब होने और लेन के हिस्से को बंद किए जाने से यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग केवल बार-बार डामरीकरण करने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचे और तकनीकी जांच के बाद स्थायी समाधान करे। इससे वाहन चालकों को राहत मिलने के साथ भविष्य में सरकारी धन से होने वाली बार-बार की मरम्मत का खर्च भी कम किया जा सकेगा।
धार के इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर 120 करोड़ रुपये की लागत वाले रेलवे ओवरब्रिज की सड़क का बार-बार खराब होना चिंता का विषय बन गया है। सात महीने के भीतर कई बार मरम्मत के बावजूद समस्या दोबारा सामने आने से निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। अब तकनीकी जांच और स्थायी समाधान की जरूरत है।
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