
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला चिकित्सालय में दंत चिकित्सकों एवं एमबीबीएस चिकित्सकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. अनुरागी के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य चिकित्सकों को तंबाकू नियंत्रण कानूनों और तंबाकू छोड़ने के लिए परामर्श सेवाओं के प्रति प्रशिक्षित करना था।
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प्रशिक्षण के दौरान दंत चिकित्सक डॉ. वरदत्त जैन एवं जिला नोडल अधिकारी (एनटीसीपी) डॉ. विनय सोनी ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों सहित अनेक गंभीर रोगों का प्रमुख कारण है।
कानूनी प्रावधानों से कराया अवगत
प्रशिक्षण में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। चिकित्सकों को बताया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए 200 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री और प्रचार-प्रसार प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध चालानी एवं दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
हर वर्ष लाखों लोगों की जाती है जान
प्रशिक्षकों ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण होती है। प्रतिदिन करीब 3,500 लोगों की जान तंबाकू जनित रोगों से जाती है, जबकि लगभग 5,500 युवा रोजाना तंबाकू की लत की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तंबाकू का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी प्रभावित करता है।
तंबाकू मुक्त स्वास्थ्य संस्थान बनाने का आह्वान
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों से अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों को तंबाकू मुक्त परिसर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। साथ ही मरीजों को तंबाकू छोड़ने के लिए नियमित परामर्श देने और विद्यालयों एवं समाज में जनजागरूकता अभियान चलाने में सहयोग करने का आग्रह किया गया।
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- Doctors Trained Under National Tobacco Control Programme In Tikamgarh








