
जिले की पुलिस की कमान संभाल रहे एक प्रमोटी IPS साहब एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला किसी अपराध या पुलिस कार्रवाई का नहीं, बल्कि एक महिला सब-इंस्पेक्टर के वीडियो का है। महिला SI ने वीडियो जारी कर साहब पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं और मामला अब पुलिस महकमे से निकलकर चर्चा का विषय बन गया है। महिला सब-इंस्पेक्टर का दावा है कि वह पिछले करीब पांच महीने से गंभीर बीमारी का इलाज करा रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट भी जमा किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी पांच महीने की सैलरी रोक दी गई। महिला SI के इन आरोपों के सामने आने के बाद एसपी साहब की कार्यशैली को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला SI की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, बीमारी के दौरान इलाज कराने के बावजूद उन्हें वेतन से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बीमारी से संबंधित मेडिकल सर्टिफिकेट भी विभाग में जमा किया था, लेकिन इसके बावजूद पांच महीने की सैलरी रोक दी गई। इसी को लेकर उन्होंने वीडियो जारी किया और अपनी परेशानी सामने रखी। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला पुलिस विभाग के अंदर की चर्चा से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। अब महिला SI के आरोपों ने एसपी साहब की कार्यशैली और विभागीय स्तर पर कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैसे एसपी साहब के लिए विवाद कोई नई चीज नहीं है। इससे पहले भी पड़ोसी जिले में तैनाती के दौरान वे सुर्खियों में आ चुके हैं। उस समय शिकायतों के हाथों पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठे थे और बाद में सरकार ने साहब को वहां से हटा दिया था। अब महिला SI के आरोपों और पांच महीने की सैलरी रोके जाने के दावे ने एक बार फिर साहब को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल महिला SI की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय जरूर बन गया है।
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