
आदिवासी बहुल जिले में कम बारिश के कारण फसलों पर संकट मंडरा रहा है और किसान परेशान हैं। ऐसे वक्त में इलाके के एक युवा मंत्री जी ने किसानों की चिंता को लेकर कलेक्टर से मिलने का फैसला किया। किसानों की समस्या को लेकर कलेक्टर के सामने मुद्दा रखने के लिए मंत्री जी निकले, लेकिन मुलाकात से ज्यादा चर्चा मंत्री जी के कलेक्टर तक पहुंचने के अंदाज की होने लगी। बताया जाता है कि मंत्री जी पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे। इसके बाद उनकी इस पदयात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए। किसानों की समस्या को लेकर की गई इस पहल का एक अलग ही एंगल सोशल मीडिया पर देखने को मिला।
सोशल मीडिया पर लोगों ने मंत्री जी की इस पदयात्रा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि अपनी ही सरकार में एक मंत्री को कलेक्टर से मिलने के लिए पदयात्रा निकालने की जरूरत आखिर क्यों पड़ गई? ट्रोलर्स ने इसे किसानों के मुद्दे से ज्यादा ‘पब्लिसिटी वॉक’ बता दिया। लोगों का तर्क था कि कलेक्टर साहिबा खुद काफी मिलनसार और सरल मिजाज की बताई जाती हैं, फिर मंत्री जी को ऐसा कौन सा प्रोटोकॉल निभाना पड़ा कि पैदल मार्च करके ही दरबार में हाजिरी लगानी पड़ी। इस वजह से किसानों की सूखी फसल और उनकी परेशानियों से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर मंत्री जी की पैदल एंट्री के अंदाज पर केंद्रित हो गया।
मंत्री जी का मकसद किसानों की समस्या को सामने रखना रहा हो, लेकिन सोशल मीडिया ने पूरी कहानी का एंगल ही बदल दिया। कम बारिश के कारण किसानों की फसलों पर मंडरा रहे संकट से शुरू हुई यह कहानी मंत्री जी की ‘पैदल एंट्री’ तक पहुंच गई। एक तरफ किसान कम बारिश के चलते अपनी फसलों को लेकर परेशान हैं और दूसरी तरफ मंत्री जी के कलेक्टर से मिलने के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। अब चर्चा यही है कि मंत्री जी की पदयात्रा को किसानों के मुद्दे को सामने रखने की पहल के तौर पर देखा जाए या सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के कारण यह मामला ‘पब्लिसिटी वॉक’ की चर्चा में ही सिमट गया।
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