
ग्वालियर: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने अब अपनी नई राजनीतिक जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। लंबे समय से पार्टी में उपेक्षित चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के भांजे अनूप मिश्रा ने अब ‘विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद’ के माध्यम से देश भर के ब्राह्मणों को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है।
महामंडलेश्वर के आदेश पर संगठन का विस्तार
पत्रकारों से चर्चा करते हुए अनूप मिश्रा ने बताया कि प्रसिद्ध संत महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज के आदेशानुसार, वर्ग और उपवर्गों में बंटे ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाने के लिए इस परिषद का विस्तार देश के हर राज्य और हर जिले में किया जाएगा। उन्होंने आह्वान किया कि परशुराम जयंती के अवसर पर जो अलग-अलग चल समारोह निकाले जा रहे हैं, उन सभी को और समूचे समाज को अब एक साथ आने की आवश्यकता है।
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राजनीतिक हाशिए का छलका दर्द
राजनीतिक गलियारों में अनूप मिश्रा की इस पहल को उनकी वापसी की छटपटाहट के रूप में देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी पहली पंक्ति के नेता रहे अनूप मिश्रा को पिछले कुछ समय से भाजपा ने चुनावी मैदान और संगठनात्मक पदों से दूर रखा है। उनके ही क्षेत्र में अन्य नेताओं को तवज्जो मिलने के कारण अनूप मिश्रा का दर्द बातों-बातों में छलक ही गया। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर अपनी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन समाज की शरण में जाना उनके राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
एकजुटता के दावे और चुनौतियां
अनूप मिश्रा के इन दावों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निजी स्वार्थ और गुटबाजी में उलझे समाज को एक मंच पर लाना ‘दूर की कौड़ी’ साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या अनूप मिश्रा ब्राह्मण समाज को वाकई एकजुट कर पाएंगे या फिर यह संगठन केवल उनकी राजनीतिक पुनर्स्थापना का एक जरिया बनकर रह जाएगा।
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