
सागर/मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को बड़ी राहत देते हुए कांग्रेस नेता एवं पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रस्तुत किए गए चुनावी शपथपत्र में संपत्ति संबंधी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 29 जुलाई 2026 को याचिका को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत याचिका पूर्णतः भ्रांतिपूर्ण है और इसमें पर्याप्त आधार नहीं है।
इसी विषय से जुड़ी कांग्रेस नेता राजकुमार धनोरा की याचिका पर भी संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग ने भी अपना जवाब उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। धनोरा की ओर से अधिवक्ता द्वारा बहस के लिए समय मांगे जाने पर न्यायालय ने याचिका की पोषणीयता (मेंटेनेबिलिटी) पर सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
संपत्ति छिपाने का लगाया गया था आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपने परिवार से संबंधित एक शिक्षा समिति की संपत्तियों का विवरण चुनावी शपथपत्र में शामिल नहीं किया। इस आधार पर चुनावी हलफनामे को अधूरा और भ्रामक बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
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मंत्री पक्ष ने रखा यह तर्क
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय ने न्यायालय में कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार प्रत्याशी को केवल अपनी तथा अपने आश्रितों की संपत्तियों का विवरण देना अनिवार्य है। मंत्री ने अपने तथा अपनी आश्रित पत्नी की सभी संपत्तियों का पूरा विवरण शपथपत्र में प्रस्तुत किया था और किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं छिपाई गई। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि दोनों याचिकाएं विधानसभा चुनाव संपन्न होने के लगभग दो वर्ष बाद दायर की गईं, जो निर्वाचन कानूनों की भावना के अनुरूप नहीं हैं। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने भी इन याचिकाओं को निरस्त करने का आग्रह किया है।
मंत्री बोले- छवि धूमिल करने के लिए दायर की गईं याचिकाएं
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि उन्होंने अब तक सात विधानसभा चुनाव लड़े हैं और कभी भी अपने चुनावी शपथपत्र में कोई जानकारी नहीं छिपाई है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ आज तक कोई चुनाव याचिका सफल नहीं हुई है। मंत्री ने आरोप लगाया कि केवल मीडिया में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से असत्य एवं भ्रामक तथ्यों के आधार पर रिट याचिकाएं दायर की गईं। उन्होंने कहा कि समान आधार वाली एक याचिका हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है, जबकि दूसरी याचिका पर अभी सुनवाई शेष है। न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने का पूरा विश्वास है।
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