
भारत में वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार वैगन-आर को बाजार में उतारा गया है, जो 85 प्रतिशत एथेनॉल (E85) और पेट्रोल के मिश्रण पर चलने में सक्षम है। इस नई कार की शुरुआती कीमत ₹7.24 लाख रखी गई है, जो इसके पारंपरिक पेट्रोल मॉडल की तुलना में लगभग ₹86,000 अधिक है। विशेषज्ञ इसे भारत के ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वाहन विभिन्न अनुपात में एथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण पर आसानी से चल सकता है। इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और आयातित ईंधन पर होने वाले खर्च में कमी लाने में मदद मिल सकती है। भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है और परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ एवं किफायती ईंधन के उपयोग को प्राथमिकता दे रही है। इसी रणनीति के तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल आधारित वाहनों के बढ़ते उपयोग से किसानों को भी लाभ मिल सकता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। ऐसे में इसकी मांग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, एथेनॉल को अपेक्षाकृत पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि नई तकनीक के व्यापक उपयोग के लिए देशभर में एथेनॉल ईंधन की उपलब्धता और वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना भी आवश्यक होगा। ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का कहना है कि यदि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय होते हैं, तो आने वाले वर्षों में अन्य कंपनियां भी इस दिशा में नए मॉडल लॉन्च कर सकती हैं। फिलहाल 85 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली वैगन-आर को भारत की हरित परिवहन नीति और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
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