
नई दिल्ली: दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध के संकट और महंगाई के दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 FY26 में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट GDP Growth Rate 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो कि इससे पिछले वित्त वर्ष FY25 की 7.1 प्रतिशत की विकास दर से काफी अधिक है। वहीं, जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की शानदार दर से बढ़ी है, जिसने ब्लूमबर्ग के सर्वे में अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 7.3 फीसदी के अनुमान को भी पीछे छोड़ दिया है।
महामारी के बाद पहली बार बदला ‘आधार वर्ष’ (Base Year)
इस बार राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जीडीपी के आंकड़े बिल्कुल नए आधार वर्ष के तहत जारी किए हैं। सरकार ने अब 2011-12 के स्थान पर 2022-23 को नया आधार वर्ष (Base Year) बनाया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय आय की गणना में कई नए डिजिटल स्रोतों को भी शामिल किया गया है, ताकि कोरोना महामारी के बाद देश में बदले कंजम्पशन पैटर्न (उपभोग के तरीके) और तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी को सटीक रूप से मापा जा सके।
कितना रहा भारतीय इकोनॉमी का आकार?
आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, महंगाई के प्रभाव को हटाने के बाद (स्थिर कीमतों पर):
चौथी तिमाही (Q4 GDP): देश की जीडीपी बढ़कर 87.77 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो बीते साल की समान अवधि में 81.40 लाख करोड़ रुपये थी।
पूरा वित्त वर्ष (FY26 GDP): वास्तविक जीडीपी का आकार बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल 299.89 लाख करोड़ रुपये पर था।
मौजूदा कीमतों पर (Nominal GDP): मौजूदा बाजार भाव के आधार पर देश की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है, जिसमें सालाना 9.1 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है।
GVA में मजबूत उछाल, निजी निवेश ने दी रफ्तार
आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन का मुख्य पैमाना मानी जाने वाली ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में भी बड़ी मजबूती देखी गई है। चौथी तिमाही में वास्तविक जीवीए 7.9 फीसदी की छलांग लगाकर 80.18 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल 74.32 लाख करोड़ रुपये थी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डोमेस्टिक मार्केट में निजी खपत और कॉर्पोरेट निवेश में आई तेजी ने पूरी इकोनॉमी को बूस्ट देने का काम किया है।
शानदार नतीजों के बावजूद आगे राह आसान नहीं: RBI ने घटाया अनुमान
तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि शानदार आंकड़ों के बावजूद भविष्य की राह में कई रोड़े नजर आ रहे हैं। महंगा कच्चा तेल, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ता सैन्य तनाव, अल-नीनो का प्रभाव और कमजोर मानसून भारतीय बाजार के लिए बड़े खतरे बने हुए हैं। इसी वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भविष्य को लेकर बेहद सतर्क है। आरबीआई ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक के तिमाही अनुमानों के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 6.6%, दूसरी में 6.3%, तीसरी में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने की संभावना है।
- india-gdp-growth-rate-fy-2025-26-q4-gdp-7-point-8-percent-rbi-forecast










