
देश में नई आपराधिक न्याय व्यवस्था लागू हुए दो साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन नई धाराओं और प्रावधानों को लेकर वकीलों के सामने अब भी कई व्यावहारिक चुनौतियां बनी हुई हैं। अदालतों में नई धाराओं के इस्तेमाल को लेकर स्थिति यह है कि कई बार याचिकाओं और शिकायतों में नई धारा के साथ पुरानी धारा का भी उल्लेख किया जा रहा है, ताकि मामले को समझने में आसानी हो।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे कानून लागू
दरअसल, केंद्र सरकार ने आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पुराने कानूनों की जगह नई संहिताएं लागू की थीं। इसके बाद अपराधों की धाराओं, प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों में बदलाव हुआ। नई व्यवस्था के तहत भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे कानून लागू किए गए।
पुराने और नए कानूनों के बीच तुलना
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नई धाराओं के लागू होने के दो साल बाद भी कानूनी दिग्गजों और अधिवक्ताओं के लिए सभी नए प्रावधानों को पूरी तरह याद रखना चुनौती बना हुआ है। कोर्ट में बहस और कानूनी दस्तावेज तैयार करते समय कई बार पुराने और नए कानूनों के बीच तुलना करनी पड़ती है।
न्याय व्यवस्था का उद्देश्य
हालांकि, नई न्याय व्यवस्था का उद्देश्य आपराधिक मामलों की प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है। इसके लिए पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को नए कानूनों के अनुसार काम करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बावजूद इसके, कानून में हुए व्यापक बदलावों को पूरी तरह व्यवहार में लाने में समय लग रहा है।
सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय
नई व्यवस्था को पूरी तरह सहज बनाने के लिए लगातार प्रशिक्षण, कानूनी जागरूकता और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
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