
मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अवार्ड को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार, राज्य पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी को IPS अवार्ड मिलने की उम्मीद लगभग तय मानी जा रही थी। पुलिस मुख्यालय में भी उनके नाम को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे थे और कई सहयोगियों ने उन्हें अग्रिम बधाइयां तक दे दी थीं। लेकिन अंतिम समय में परिस्थितियां बदल गईं और उनकी उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी का नाम वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर मजबूत दावेदारों में शामिल था। यही वजह थी कि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उन्हें पहले से ही बधाई देने लगे थे। बताया जाता है कि इस घटनाक्रम के चलते कुछ समय के लिए माहौल पूरी तरह उत्साहपूर्ण हो गया था। हालांकि, बाद में पता चला कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच अभी भी लंबित है, जिसके कारण उनका मामला अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच सका।
प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी राज्य पुलिस सेवा अधिकारी को IPS अवार्ड देने से पहले उसके सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, पात्रता और लंबित विभागीय मामलों की विस्तृत समीक्षा की जाती है। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होती है, तो उसका मामला अंतिम निर्णय तक रोका जा सकता है। यही वजह बताई जा रही है कि इस बार भी संबंधित अधिकारी को इंतजार करना पड़ा।
फिलहाल पुलिस विभाग में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि विभागीय जांच समय पर पूरी हो जाती है और अधिकारी को क्लीन चिट मिलती है, तो भविष्य की सूची में उनका नाम फिर से शामिल हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला संबंधित चयन प्रक्रिया और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। अब सभी की नजर आगामी IPS अवार्ड सूची और विभागीय जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।
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