
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में इन दिनों एक युवा IPS अधिकारी की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, आर्थिक नगरी में पदस्थ यह अधिकारी अपनी अनोखी कार्यशैली के कारण लगातार सुर्खियों में हैं। चर्चा है कि वे नियमित कार्यालय की बजाय कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों और विभागीय समीक्षा का काम अक्सर गेस्ट हाउस से करना अधिक सुविधाजनक मानते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं।
बताया जाता है कि अधिकारी देर शाम तक कार्यालय में बैठने के बजाय गेस्ट हाउस से फाइलों की समीक्षा, अधिकारियों के साथ बैठकें और विभागीय रणनीति पर चर्चा करना पसंद करते हैं। कई बार विभागीय अधिकारी भी आवश्यक फाइलें और दस्तावेज लेकर गेस्ट हाउस पहुंचते हैं, जहां लंबी बैठकों के बाद प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी का मानना है कि औपचारिक कार्यालय की तुलना में वहां शांत वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है।
हालांकि इस कार्यशैली को लेकर विभाग के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी जहां बैठकर काम करें, वही उनके लिए कार्यालय जैसा होता है और इससे कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सरकारी कार्यों का संचालन मुख्य रूप से निर्धारित कार्यालय से ही होना चाहिए, ताकि आम नागरिकों और अधीनस्थ अधिकारियों को अनावश्यक असुविधा न हो। यही वजह है कि यह मुद्दा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल संबंधित अधिकारी की ओर से इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी कार्य समय पर और प्रभावी ढंग से पूरे हो रहे हैं तो कार्यस्थल से अधिक महत्वपूर्ण परिणाम होते हैं। फिर भी सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया का पालन उतना ही आवश्यक माना जाता है। आने वाले समय में इस कार्यशैली को लेकर विभाग का आधिकारिक रुख सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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