
ब्यूरोक्रेसी में प्रमोशन कभी-कभी सिर्फ पद नहीं बढ़ाता, बल्कि साहब की सालों पुरानी टेंशन भी खत्म कर देता है। इन दिनों एक सीधी भर्ती वाले आईपीएस साहब की कहानी कुछ ऐसी ही बताई जा रही है। वर्षों से प्रमोशन की राह देख रहे साहब को सरकार ने आखिरकार ऐसा प्रमोशन दिया कि एक झटके में डबल प्रमोशन मिल गया और पुरानी अड़चन भी दूर हो गई। बताया जाता है कि मामला कुछ साल पुराना है। साहब पड़ोसी राज्य में डेप्युटेशन पर गए थे। वहां उनकी कार्यशैली को लेकर कथित तौर पर नाराजगी हुई और उनकी सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बाद प्रमोशन की राह में ऐसी अड़चन आई कि साहब लंबे समय तक अपने प्रमोशन का इंतजार करते रहे।
प्रमोशन की रफ्तार थमने का असर यह हुआ कि साहब के कई जूनियर उनसे आगे निकल गए और प्रमोशन पाकर एडीजी तक पहुंच गए, जबकि साहब डीआईजी पद पर ही अटके रहे। यानी जिन अधिकारियों ने उनके बाद सेवा शुरू की थी, वे भी पद और जिम्मेदारी के मामले में उनसे आगे निकलते चले गए। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही और साहब के लिए प्रमोशन एक बड़ी टेंशन बना रहा। इसी बीच कहानी में आईएएस मैडम की एंट्री हुई। बताया जाता है कि साहब की पत्नी ने मोर्चा संभाला और रिकॉर्ड में सुधार कराने से लेकर प्रमोशन की अड़चन दूर कराने तक तमाम स्तरों पर प्रयास किए। इसके बाद धीरे-धीरे प्रमोशन का रास्ता साफ होने लगा और वर्षों से अटका मामला आगे बढ़ा।
आखिरकार साहब को प्रमोशन मिल गया और अब साहब एडीजी बन चुके हैं। यानी वर्षों से जो जूनियर अधिकारी उनसे आगे निकल गए थे, उनसे आगे निकलने का रास्ता आखिरकार खुल ही गया। एक साथ मिले प्रमोशन ने न केवल साहब की पद संबंधी स्थिति बदल दी, बल्कि वर्षों से चली आ रही टेंशन को भी खत्म कर दिया। अब ब्यूरोक्रेसी में इसी बात की चर्चा है कि लंबे इंतजार के बाद साहब को आखिरकार वह मुकाम मिल गया, जिसका उन्हें वर्षों से इंतजार था। पुराने सर्विस रिकॉर्ड और प्रमोशन की अड़चन के बीच अटका मामला आखिरकार सुलझा और साहब डीआईजी से एडीजी के पद तक पहुंच गए।
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