
जबलपुर। मुहर्रम के अवसर पर जबलपुर शहर में सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनूठी मिसाल देखने को मिली। शहर में मुहर्रम का पर्व पूरी सादगी, शांति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता देखने को मिली।
मदन महल मस्जिद के खतीब हाफ़िज़ मोहम्मद रईस ने बताया कि मुहर्रम की सातवीं तारीख को शहर के विभिन्न क्षेत्रों से सवारियां और जुलूस गश्त करते हुए मदन महल पहुंचते हैं, जहां उनका समापन होता है। उन्होंने कहा कि जबलपुर की पहचान हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब रही है और यहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर पर्व मनाते हुए प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश देते हैं।
स्थानीय निवासी सी.पी. श्रीवास्तव ने बताया कि वे पिछले 65 वर्षों से जबलपुर में रह रहे हैं और उनके अनुभव में यहां की मुहर्रम सवारियां अपनी भव्यता और सांस्कृतिक सौहार्द के लिए देशभर में अलग पहचान रखती हैं। उन्होंने कहा कि शहर में सभी समुदायों के लोग आपसी सम्मान और सहयोग के साथ रहते हैं तथा समाज में प्रेम और एकता की भावना को आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं तो उनसे निपटना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जबकि जबलपुर की आम जनता हमेशा से भाईचारे और सौहार्द के साथ जीवन जीती आई है।
मुहर्रम के अवसर पर जबलपुर से एक बार फिर यह संदेश सामने आया कि सामाजिक एकता, पारस्परिक सम्मान और साझा संस्कृति ही शहर की सबसे बड़ी पहचान है।








