
रांची/नई दिल्ली: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, जेपीएससी (JPSC) और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और सीबीआई जांच की मांग
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखते हुए मांग की कि 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को राज्य सीआईडी से हटाकर सीबीआई या सर्वोच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी वाली स्वतंत्र समिति को सौंपा जाए। पीठ ने पूर्व न्यायाधीश से जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह फोरेंसिक और व्यापक जांच का विषय है, जिसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए।
क्या हैं मुख्य आरोप और विवाद का कारण?
याचिका में 2 जुलाई 2026 को घोषित परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई ओएमआर शीट का हवाला दिया गया है। आरोप है कि एक अभ्यर्थी ने 100 में से महज 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, लेकिन फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। इसके अलावा, परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्स एजेंसी ‘टीएसडीपीएल’ TSDPL की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसे पहले भी कथित गड़बड़ियों के कारण जेएसएससी JSSC द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
प्रमाणों को सुरक्षित रखने और पारदर्शी जांच की अपील
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले के सभी भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत सील व सुरक्षित किया जाए। 1. मूल ओएमआर शीट और अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी 2. परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज 3. सर्वर ऑडिट लॉग, अटेंडेंस शीट और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड याचिका में स्पष्ट किया गया है कि केवल समाचारों के आधार पर परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं की गई है, बल्कि एक समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के जरिए ‘दागी’ और ‘निर्दोष’ अभ्यर्थियों की पहचान करने तथा संस्थागत पारदर्शिता बहाल करने का आग्रह किया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट के फैसले से बदला घटनाक्रम
इससे पहले, JPSC भर्ती विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की गई थी। हाईकोर्ट के उस आदेश से नियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां जारी नोटिस पर राज्य सरकार और आयोगों के जवाब का इंतजार है।
ये भी पढ़े – 27 अगस्त को खेलो इंडिया संवाद का आयोजन, पीएम मोदी करेंगे वर्चुअल संबोधन, युवाओं से खेल और भविष्य पर होगी चर्चा
- jpsc-prelims-2025-irregularities-supreme-court-cbi-investigation-notice







