
झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन और झारखंड सचिवालय के बाहर पहुंचे और सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा रद्द करने के निर्णय को एकतरफा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
करीब 2 हजार चयनित अभ्यर्थियों पर नौकरी का संकट
JSSC-CGL परीक्षा के जरिए करीब 2 हजार अभ्यर्थियों का चयन हुआ था और कई अभ्यर्थी विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त होकर काम भी कर रहे हैं। राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद इन कर्मचारियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन बिना व्यक्तिगत दोष साबित किए सभी सफल अभ्यर्थियों को दंडित करना उचित नहीं है।
बैरिकेडिंग तोड़कर सचिवालय में घुसने की कोशिश
बुधवार को प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर सचिवालय परिसर में प्रवेश किया। अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना पक्ष सुने जाने की मांग की।
‘गलती किसी की, सजा हमें क्यों?’
प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट के आधार पर चयन हासिल किया और उसके बाद नियुक्ति पाई। उनका सवाल है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों पर तय की जानी चाहिए। पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर उन अभ्यर्थियों को बेरोजगार करना, जिनकी किसी गड़बड़ी में भूमिका साबित नहीं हुई है, उनके साथ अन्याय है।
झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे चयनित अभ्यर्थी
सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। तीन अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्त अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और नौकरी पर तत्काल सुरक्षा की मांग की है। उनका तर्क है कि व्यक्तिगत रूप से दोष साबित किए बिना पूरी भर्ती रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। मामले की सुनवाई 20 अगस्त को होने की संभावना है।
सरकार ने क्यों रद्द की परीक्षा?
झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा के साथ ही 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने का फैसला किया था। सरकार ने यह निर्णय भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच लिया। साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा भी की गई।
इस फैसले से जहां लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने इसे बड़ी जीत बताया, वहीं JSSC-CGL में चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। ऐसे में सभी की नजर अब झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
यह भी पढ़े: आधुनिक भारत के शिल्पकार राजीव गांधी: दूरदर्शी फैसलों ने रखी 21वीं सदी के भारत की नींव
- jssc-cgl-cancellation-selected-candidates-protest-ranchi








