
छतरपुर, 6 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर समूह स्थित जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की 11वीं सदी की खंडित प्रतिमा के संरक्षण और बहाली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने प्रतिमा के गायब सिर को मूल धड़ से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है, जो पहले प्रतिमा का विस्तृत निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही सिर को जोड़ने और अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की तकनीक तय की जाएगी।
11वीं सदी की है भगवान विष्णु की प्रतिमा
जवारी मंदिर में मौजूद भगवान विष्णु की यह प्रतिमा करीब सात फीट ऊंची बताई जाती है। प्रतिमा का धड़, चार भुजाएं और पैर मौजूद हैं, जबकि सिर गायब है। प्रतिमा चंदेलकालीन स्थापत्य और शिल्पकला का हिस्सा मानी जाती है।
प्रतिमा में भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी और गरुड़ की आकृतियां भी दिखाई देती हैं। इसके अलावा आसपास विष्णु के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाने वाली शिल्पाकृतियां भी मौजूद हैं। जवारी मंदिर खजुराहो के विश्व धरोहर स्मारक समूह का हिस्सा है।
ASI की PRO और संयुक्त महानिदेशक डॉ. नंदिनी भट्टाचार्य के मुताबिक, बहाली के काम में विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है। पहले प्रतिमा की स्थिति का उचित निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए प्रतिमा को तुरंत पूरी तरह पहले जैसा कर देने की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।
यह भी पढ़े: लाड़ली बहना योजना पर सीएम मोहन यादव का मजाकिया जवाब, बोले- बहुत महंगी पड़ गई
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था प्रतिमा का मामला
भगवान विष्णु की इस खंडित प्रतिमा को लेकर मामला पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। याचिका में प्रतिमा के सिर के पुनर्निर्माण और उसे मंदिर में पुनः स्थापित करने की मांग की गई थी। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा था कि खजुराहो के संरक्षित मंदिर ASI के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और प्रतिमा के संरक्षण से जुड़े निर्णय विशेषज्ञ संस्था को लेने चाहिए।
इसके बाद यह मामला काफी चर्चा में रहा। अब ASI की ओर से प्रतिमा के संरक्षण की प्रक्रिया शुरू किए जाने से एक बार फिर यह धरोहर सुर्खियों में है।
विशेषज्ञ जांच के बाद तय होगा मरम्मत का तरीका
प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण में सबसे बड़ी चुनौती उसके ऐतिहासिक स्वरूप और प्रामाणिकता को बनाए रखना है। ऐसे में ASI की विशेषज्ञ टीम पहले प्रतिमा की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके बाद सिर और अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों की बहाली को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल ASI ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सिर को जोड़ने का काम कब तक पूरा होगा। अधिकारियों के अनुसार उचित निरीक्षण के बाद ही मरम्मत की वास्तविक प्रक्रिया और समयसीमा सामने आएगी।
खजुराहो की यह धरोहर चंदेलकालीन कला और स्थापत्य की महत्वपूर्ण मिसाल मानी जाती है। ऐसे में प्रतिमा का संरक्षण न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- khajuraho-javari-temple-vishnu-idol-restoration








