
मध्य प्रदेश के वन महकमे में इन दिनों एक वरिष्ठ अधिकारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। विभागीय गलियारों में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि अधिकारी की कार्यशैली और उनके निर्देशों का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कभी उनके आदेशों का स्पष्ट असर दिखाई देता था, अब वहीं कई मामलों में निर्देशों की अनदेखी होने की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग में अवैध कटाई और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कई बार संबंधित अधिकारी के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे विभागीय कार्रवाई की गति प्रभावित होती है। वहीं विभाग के कुछ जानकारों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कई अधीनस्थ अधिकारी अपने स्तर पर फैसले लेने लगे हैं, जिससे वरिष्ठ अधिकारी की पकड़ पहले जैसी मजबूत दिखाई नहीं देती।
विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि अधिकारी अपने पद और अधिकारों का प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बदलते हालात में उनकी प्रशासनिक पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि समय रहते विभाग में समन्वय और अनुशासन की स्थिति मजबूत नहीं हुई, तो इसका असर वन संरक्षण और विभागीय कार्यों की प्रभावशीलता पर भी पड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल यह पूरा मामला चर्चाओं और दावों के स्तर पर है। यदि विभाग के भीतर वास्तव में आदेशों की अनदेखी हो रही है या प्रशासनिक समन्वय में कमी आई है, तो इसकी स्पष्ट तस्वीर केवल विभागीय समीक्षा या आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाता है और भविष्य में क्या कदम उठाए जाते हैं।
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