रायसेन कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने संभाली कमान; गेहूं उपार्जन स्लॉट बुकिंग की दिक्कतों पर एक्शन, तकनीकी बाधाएं होंगी दूर

रायसेन: मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में किसानों की समस्या को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा अपने टीम के साथ खुद खेतों में पहुंचे और फसलों का पुनः सत्यापन किया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना और उनकी उपज बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाना है।

किसानों को क्यों करना पड़ा दोबारा सत्यापन?

हाल ही में गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग के दौरान कई किसानों को पोर्टल पर तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा। सिस्टम में उनकी फसल का सत्यापन अधूरा दिखाया जा रहा था, जबकि जमीन पर स्थिति अलग थी। इस वजह से किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं कर पा रहे थे। इससे उनके सामने आर्थिक और समय की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। कलेक्टर ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और तुरंत राजस्व विभाग को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए।

कलेक्टर खुद पहुंचे खेतों में, क्या हुआ मौके पर?

रायसेन में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने खुद मैदान में उतरने का फैसला किया। वे रायसेन तहसील के मेंडोरी और नीमखेड़ा गांव पहुंचे और वहां किसानों की फसलों का दोबारा सत्यापन किया। इस दौरान उनके साथ सहायक कलेक्टर कुलदीप पटेल, एसडीएम मनीष शर्मा और तहसीलदार भरत सिंह मंडले भी मौजूद रहे। अधिकारियों की टीम ने खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया और रिकॉर्ड को अपडेट किया। इस कदम से किसानों में भरोसा बढ़ा है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझ रहा है और तुरंत समाधान कर रहा है।

क्या इस पहल से किसानों को मिलेगा स्थायी समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फील्ड वेरिफिकेशन से तत्काल राहत तो मिलती है, लेकिन भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है। सरकार को चाहिए कि पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करे और डेटा अपडेट प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए। अगर सिस्टम मजबूत होगा, तो किसानों को बार-बार सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

रायसेन में कलेक्टर द्वारा खेतों में जाकर फसल सत्यापन करना एक सकारात्मक पहल है। इससे न सिर्फ किसानों की तत्काल समस्या का समाधान हुआ, बल्कि प्रशासन के प्रति भरोसा भी बढ़ा है। हालांकि, भविष्य के लिए जरूरी है कि तकनीकी सिस्टम को बेहतर बनाया जाए ताकि ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

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  • Srota Swati Tripathy

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