
रायसेन/दीपक श्रीवास्तव की रिपोर्ट: जिले में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा भूसे के जिले से बाहर परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद बड़ी मात्रा में भूसा जिले की सीमाओं से बाहर भेजे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार रात के समय तथा कम निगरानी वाले मार्गों का उपयोग कर भूसे से भरे ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार जिले से बाहर भेजी जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे प्रतिबंध के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
जिला प्रशासन ने किसानों और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लगाया था, ताकि जिले में पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध रहे और भविष्य में किसी प्रकार का संकट उत्पन्न न हो। प्रशासन का उद्देश्य था कि सूखे और गर्मी के मौसम में स्थानीय स्तर पर भूसे का पर्याप्त भंडारण बना रहे, जिससे पशुपालकों को राहत मिल सके। हालांकि प्रतिबंध के बावजूद भूसे का परिवहन जारी रहने से इस उद्देश्य पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। कई ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि जिले के विभिन्न हिस्सों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भूसा बाहर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इस पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले महीनों में जिले के पशुपालकों को चारे की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। किसानों का यह भी कहना है कि संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय किसानों और पशुपालकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले की सीमाओं, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित जांच अभियान चलाया जाए। उनका कहना है कि जांच चौकियों को सक्रिय कर भूसे के परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी की जाए और बिना अनुमति जिले से बाहर भूसा भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पशुपालकों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इस वर्ष भीषण गर्मी और मौसम की अनिश्चितता ने पहले से ही पशु चारे की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई पशुपालक भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी से चारे का भंडारण कर रहे हैं। ऐसे में यदि बड़े पैमाने पर भूसा जिले से बाहर जाता रहा तो स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
जानकारों का मानना है कि पशुधन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चारे की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर न केवल पशुपालकों पर बल्कि दुग्ध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है। अब जिले के किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। सभी को उम्मीद है कि प्रशासन अपने आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएगा और भूसे के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में जिले को चारे के संभावित संकट से बचाया जा सके।
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