रन्नौद नगर परिषद की बड़ी लापरवाही: पिता की जगह बेटे का बना मृत्यु प्रमाण पत्र, जिंदा व्यक्ति सरकारी रिकॉर्ड में मृत

शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: जिले की रन्नौद नगर परिषद की एक कथित प्रशासनिक लापरवाही ने एक जीवित व्यक्ति की जिंदगी मुश्किलों में डाल दी। आरोप है कि वर्ष 2022 में पिता की मृत्यु के बाद नगर परिषद ने गलती से पिता के बजाय बेटे का ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। नतीजा यह हुआ कि जिंदा व्यक्ति सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज हो गया और उसकी कई सरकारी योजनाओं का लाभ बंद हो गया। अब पीड़ित ने कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

पिता की मौत हुई, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में बेटा ‘मृत’ हो गया

मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे गिटला आदिवासी ने बताया कि वर्ष 2022 में उनके पिता जगनी आदिवासी का निधन हुआ था। परिवार ने नियमानुसार मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन वर्ष 2023 में रन्नौद नगर परिषद ने कथित तौर पर बड़ी लापरवाही करते हुए पिता की जगह उनका ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

इस एक गलती ने उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं।

सरकारी योजनाएं बंद, तीन साल से दफ्तरों के चक्कर

पीड़ित का कहना है कि गलत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, कुटीर योजना समेत कई शासकीय सुविधाएं प्रभावित हो गईं। सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना भी बंद हो गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से वह इस त्रुटि को सुधारवाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया।

जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार

लगातार परेशानियों से जूझ रहे गिटला आदिवासी ने मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत की। उन्होंने मांग की कि उनके नाम से जारी गलत मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल निरस्त किया जाए और सरकारी रिकॉर्ड में सही जानकारी दर्ज कराई जाए।

साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि गलत रिकॉर्ड के कारण बंद हुई सभी शासकीय योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दोबारा शुरू कराया जाए।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इस मामले ने जन्म मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह संबंधित विभाग की गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी, जिसका सीधा असर एक व्यक्ति के नागरिक अधिकारों और सरकारी योजनाओं पर पड़ा है।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

यह मामला पीड़ित द्वारा कलेक्टर जनसुनवाई में दिए गए आवेदन पर आधारित है। समाचार लिखे जाने तक नगर परिषद रन्नौद या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यह भी पढ़े: दिग्विजय सिंह ने दतिया की जनता का जताया आभार, नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह को दी बधाई

 

  • rannod-nagar-parishad-wrong-death-certificate-living-man-declared-dead
Manisha Gupta

Manisha Gupta

Related Posts

डबरा सिविल अस्पताल पहुंचीं एसडीएम जूही गर्ग, अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी

डबरा।भरत रावत| डबरा सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का…

आगे पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

मध्य प्रदेश पर बढ़ता कर्ज: शिवराज सरकार की योजनाओं की विरासत या मोहन यादव सरकार की आर्थिक चुनौती?

मध्य प्रदेश पर बढ़ता कर्ज: शिवराज सरकार की योजनाओं की विरासत या मोहन यादव सरकार की आर्थिक चुनौती?

Plastic Notes in India: क्या प्लास्टिक नोट आने से फिर होगी नोटबंदी? जानिए RBI का पूरा प्लान, फायदे, नुकसान और आपके लिए क्या बदलेगा

Plastic Notes in India: क्या प्लास्टिक नोट आने से फिर होगी नोटबंदी? जानिए RBI का पूरा प्लान, फायदे, नुकसान और आपके लिए क्या बदलेगा

पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन का निधन, 77 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन का निधन, 77 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

दतिया उपचुनाव 2026 क्यों है इतना अहम? भाजपा और कांग्रेस दोनों की साख दांव पर

दतिया उपचुनाव 2026 क्यों है इतना अहम? भाजपा और कांग्रेस दोनों की साख दांव पर

भिंड के निजी स्कूलों में किताबों और ड्रेस के नाम पर मनमानी वसूली का आरोप, अभिभावकों ने शिक्षा विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप

भिंड के निजी स्कूलों में किताबों और ड्रेस के नाम पर मनमानी वसूली का आरोप, अभिभावकों ने शिक्षा विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप