
रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम स्थित अपना घर आश्रम ने एक बार फिर मानव सेवा की मिसाल पेश करते हुए मानसिक रूप से अस्वस्थ और परिवार से बिछड़े एक युवक को उपचार के बाद उसके परिजनों से मिलाया। करीब नौ माह तक आश्रम में इलाज, देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजरने के बाद 30 वर्षीय गोविन्द प्रभु जी को 4 जुलाई को उनके पिता के साथ सम्मानपूर्वक उनके गृह जिले के लिए विदा किया गया। इस दौरान आश्रम परिसर का माहौल भावुक हो गया। गोविन्द की विदाई के समय आश्रम के सेवा सहयोगियों, चिकित्सकों, अन्य आवासियों और उनके परिजनों की आंखें नम थीं।
आश्रम प्रबंधन के अनुसार लगभग नौ माह पहले गोविन्द को अत्यंत दयनीय अवस्था में रतलाम स्थित अपना घर आश्रम लाया गया था। उस समय वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थे, शारीरिक रूप से भी कमजोर थे और अपने परिवार से बिछड़ चुके थे। उनकी पहचान और पारिवारिक जानकारी स्पष्ट नहीं थी। आश्रम में भर्ती होने के बाद चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों, काउंसलरों और सेवा सहयोगियों की टीम ने लगातार उनका उपचार किया। नियमित दवाइयों, परामर्श, पौष्टिक भोजन और आत्मीय देखभाल के कारण उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे उल्लेखनीय सुधार हुआ। स्वास्थ्य में सुधार के साथ उनकी मानसिक स्थिति भी सामान्य होने लगी और आश्रम ने उनके परिवार का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया।
ये भी पढ़े – रतलाम: 48 घंटे में नाबालिग बालिका बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार
करीब नौ महीने बाद जब गोविन्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पिता से मिले तो यह पल सभी के लिए बेहद भावुक रहा। विदाई के दौरान गोविन्द ने कहा कि आश्रम ने उन्हें नया जीवन दिया है। उन्होंने बताया कि घर लौटने के बाद वह सबसे पहले अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करेंगे, फिर रोजगार की तलाश करेंगे और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। उन्होंने आश्रम के सभी सेवा सहयोगियों, चिकित्सकों और प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां उन्हें केवल इलाज ही नहीं, बल्कि परिवार जैसा स्नेह और आत्मविश्वास भी मिला। बेटे को स्वस्थ देखकर गोविन्द के पिता भावुक हो गए। उन्होंने आश्रम प्रबंधन और सेवा में लगे सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जब परिवार ने बेटे के मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, तब अपना घर आश्रम उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि यदि आश्रम समय पर गोविन्द की देखभाल नहीं करता तो शायद उनका बेटा सामान्य जीवन में कभी वापस नहीं लौट पाता।
आश्रम प्रबंधन ने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल बेसहारा, बीमार और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उनका समुचित उपचार कर उन्हें समाज और परिवार से दोबारा जोड़ना भी है। संस्था देश के विभिन्न राज्यों में संचालित अपनी शाखाओं के माध्यम से सड़कों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लावारिस अवस्था में मिले लोगों को आश्रय, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास उपलब्ध कराती है। संस्था के अनुसार अब तक हजारों लोग स्वस्थ होकर अपने परिवारों तक वापस पहुंच चुके हैं। इस अवसर पर आश्रम प्रबंधन ने समाज से अपील भी की कि यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई बेसहारा, बीमार या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति दिखाई दे तो उसे असहाय छोड़ने के बजाय निकटतम अपना घर आश्रम या संबंधित हेल्पलाइन को सूचना दें। उनका कहना है कि समय पर मिली एक सूचना किसी बिछड़े हुए व्यक्ति को उसके परिवार से दोबारा मिलाने और उसे नया जीवन देने का माध्यम बन सकती है।
ये भी पढ़े – रतलाम: ब्लैक स्पॉट बजेड़ा फंटा पर स्ट्रीट लाइटें लगीं, सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
- ratlam-apna-ghar-ashram-reunites-mentally-recovered-man-with-family








