
रीवा/मैहर: पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने रीवा को छोटा शहर बताते हुए महानगर के रूप में विकसित करने की बात कही थी। त्रिपाठी ने कहा कि रीवा को छोटा शहर कहना विंध्य क्षेत्र के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर रीवा कब छोटा शहर था। त्रिपाठी ने याद दिलाया कि जब मध्यप्रदेश का गठन भी नहीं हुआ था, उस समय विंध्य प्रदेश अस्तित्व में था और रीवा उसकी राजधानी हुआ करता था। ऐसे ऐतिहासिक और गौरवशाली शहर को छोटा बताना उचित नहीं है।
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पूर्व विधायक ने कहा कि रीवा ने ही कई नेताओं को पहचान और सम्मान दिलाया है, इसलिए इस शहर को छोटा कहकर उसका मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार रीवा विंध्य की पहचान, धड़कन और गौरवशाली विरासत है। त्रिपाठी ने विंध्य क्षेत्र की ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि इस धरती ने लाल पद्यधर सिंह, दादू गोविंद नारायण सिंह, शंभूनाथ शुक्ला, चंद्र प्रकाश तिवारी, यमुना प्रसाद शास्त्री, कुंवर अर्जुन सिंह, गुलशेर अहमद और श्रीनिवास तिवारी जैसे कई बड़े नेताओं को देश को दिया है। इन नेताओं ने विंध्य का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया।
उन्होंने कहा कि रीवा लंबे समय से संभागीय मुख्यालय है और यहां कमिश्नरी स्थापित है। इसके बावजूद अगर इसे छोटा शहर कहा जाता है, तो यह विंध्य के लोगों की भावनाओं का अपमान है।पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि क्षेत्र के युवाओं को आज भी रोजगार के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में पलायन करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार विकास की बात कर रही है, तो विंध्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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