
सार
अरविन्द तिवारी | रीवा के संजय गांधी अस्पताल में ICU में रेजिडेंट डॉक्टरों से कथित मारपीट के विरोध में डॉक्टरों ने काम का बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया। करीब 50 रेजिडेंट डॉक्टरों के आंदोलन पर बैठने की बात सामने आई है। डॉक्टरों का आरोप है कि ICU में कुछ अटेंडरों ने विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की। उन्होंने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश रोकने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की ओर से मामले में विस्तृत आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।
विस्तार
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है। ICU में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों ने काम का बहिष्कार करते हुए अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया।
रेजिडेंट डॉक्टरों के मुताबिक, ICU में कुछ अटेंडरों के पहुंचने के बाद विवाद की स्थिति बनी और कथित तौर पर डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। डॉक्टरों का आरोप है कि संबंधित लोग शराब के नशे में थे। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस या अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल नहीं की गई है।
घटना के विरोध में करीब 50 रेजिडेंट डॉक्टरों ने रात 12 बजे काम का बहिष्कार किया और अस्पताल परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों ने अस्पताल में अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि ICU और अन्य संवेदनशील वार्डों में मरीजों के इलाज के दौरान अनधिकृत लोगों की मौजूदगी से चिकित्सकीय काम प्रभावित होता है। उनका कहना है कि डॉक्टर कई घंटे मरीजों के इलाज और देखभाल में जुटे रहते हैं, ऐसे में अस्पताल परिसर में ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होना जरूरी है।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने मांग की है कि ICU समेत संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश पर प्रभावी रोक लगाई जाए। अस्पताल में सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था मजबूत करने के साथ डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
संजय गांधी अस्पताल पहले से ही कई विवादों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में है। हाल के दिनों में मरीजों और परिजनों की शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर अस्पताल का औचक निरीक्षण भी किया गया था। कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था और साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए थे।
इसी बीच डॉक्टरों के आंदोलन से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है। अब अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की कार्रवाई पर डॉक्टरों के अगले कदम की स्थिति निर्भर करेगी।
फिलहाल पूरे मामले में मारपीट की घटना, आरोपित लोगों की पहचान और पुलिस कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन लोग जिम्मेदार थे।
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