
सागर/मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट: जिले के बड़तूमा में निर्माणाधीन संत शिरोमणि रविदास मंदिर एवं संग्रहालय परियोजना तेजी से आकार ले रही है। लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस भव्य परिसर का निरीक्षण मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य बारेलाल अहिरवार ने किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति का विस्तृत जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंदिर के मॉडल, निर्माणाधीन संरचनाओं, समरसता गैलरी तथा श्रद्धालुओं के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं का अवलोकन किया।
बारेलाल अहिरवार ने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं होगा, बल्कि संत रविदास जी के समानता, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं वैचारिक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि परिसर में विकसित की जा रही समरसता गैलरी के माध्यम से संत रविदास जी के जीवन दर्शन के साथ-साथ उनके समकालीन संतों के योगदान को भी आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी भारतीय संत परंपरा और सामाजिक चेतना से परिचित हो सकेगी।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए बनाए जा रहे आवास गृह, पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता, मार्ग, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य नागरिक सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता से समझौता न किया जाए और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं ताकि श्रद्धालुओं को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस अवसर पर नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 11 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे इस परिसर पर करीब 101 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर को शहर तथा प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों से जोड़ने के लिए नई सड़कों का निर्माण भी कराया जा रहा है, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।
विधायक प्रदीप लारिया ने बताया कि मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया जा रहा है और इसकी ऊंचाई लगभग 66 फीट होगी। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में लोहे का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जा रहा है। पूरा ढांचा तराशे गए लाल पत्थरों से तैयार किया जा रहा है, जो भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय और ऑडिटोरियम भी बनाया जा रहा है, जहां संत रविदास जी के जीवन, उनके सामाजिक योगदान, विचारों और प्रेरक प्रसंगों को ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को संत रविदास जी के जीवन और उनके संदेश को आधुनिक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।
विधायक ने कहा कि निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और इसके पूर्ण होने के बाद मंदिर का भव्य लोकार्पण किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के प्रधानमंत्री को भी आमंत्रित करने की योजना है। उनका कहना था कि यह परिसर भविष्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनकर देश-दुनिया के लोगों को भारत की महान संत परंपरा से जोड़ने का कार्य करेगा।
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मकरोनिया नगर पालिका अध्यक्ष मिहीलाल अहिरवार, गुरु रविदास विश्वमहापीठ से डॉ. परशुराम, जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त अदिति शांडिल्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आयोग के सदस्य को निर्माण कार्यों की वर्तमान प्रगति और आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी दी।
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