
सागर जिले में बिना सक्षम अनुमति के कॉलोनी विकसित करने और प्लॉटिंग करने के मामलों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के तहत 12 कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित लोगों को अवैध कॉलोनी के चिन्हांकन और निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। आदेश का पालन नहीं होने पर अवैध निर्माण हटाने, जमीन के अभिलेख में उसे अहस्तांतरणीय दर्ज करने और संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बीना, रहली और राहतगढ़ में सामने आए मामले
प्रशासन की कार्रवाई सागर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में की गई है। बीना तहसील के इटावा में पांच मामलों में कार्रवाई हुई है। वहीं रहली तहसील के बमूराजैसिंह और रहलीखास में छह मामलों तथा राहतगढ़ तहसील के मढ़ा क्षेत्र में दो लोगों से जुड़े मामले सामने आए हैं। इनमें बिना सक्षम अनुमति के जमीन पर प्लॉट काटकर कॉलोनी विकसित करने के आरोप हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित जमीन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित भूमि की खरीद-बिक्री रोकने के लिए उप-पंजीयक कार्यालय को जानकारी भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी कार्रवाई केवल निर्माण हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन के लेनदेन पर भी असर पड़ सकता है।
खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल-प्लॉट खरीदने से पहले क्या देखें?
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्होंने वहां अपनी जीवनभर की बचत लगाई है। ऐसे में केवल कॉलोनाइजर की बात पर भरोसा करके जमीन खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। प्लॉट या मकान खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन का स्वामित्व किसके नाम है। संबंधित खसरा और भूमि अभिलेख की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा यह भी पता करना जरूरी है कि जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही है, उसके लिए सक्षम प्राधिकरण से जरूरी अनुमति मिली है या नहीं।
सिर्फ पंजीकृत विक्रय पत्र होना यह साबित नहीं करता कि पूरी कॉलोनी वैध है। इसलिए खरीदार को कॉलोनी विकास की अनुमति, भूमि उपयोग और संबंधित स्वीकृतियों की भी जांच करनी चाहिए।
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केवल विज्ञापन और सुविधा देखकर फैसला न लें
अवैध प्लॉटिंग के मामलों में कई बार खरीदारों को सड़क, बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं का भरोसा देकर जमीन बेची जाती है। लेकिन भविष्य में अगर प्रशासन उस कॉलोनी को अवैध घोषित करता है तो खरीदार को कानूनी और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी हो सकती है। इसलिए किसी भी प्लॉट की खरीद से पहले संबंधित नगर निकाय या सक्षम विकास प्राधिकरण से उसकी स्थिति की पुष्टि करना बेहतर है। जमीन का नक्शा, खसरा, स्वामित्व, बंधक या विवाद की स्थिति और कॉलोनी से संबंधित स्वीकृतियां जांचना जरूरी है।
सागर प्रशासन की मौजूदा कार्रवाई इसी खतरे की ओर इशारा करती है। जब प्रशासन संबंधित जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दे रहा है, तो खरीदारों के लिए दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
15 दिन बाद क्या होगा?
कलेक्टर न्यायालय के आदेश के अनुसार संबंधित कॉलोनाइजरों को 15 दिन की समयसीमा दी गई है। इस अवधि में अवैध कॉलोनी के चिन्हांकन और निर्माण हटाने के निर्देश हैं। अगर आदेश का पालन नहीं होता है तो प्रशासन अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा संबंधित जमीन के खसरे के कॉलम नंबर 12 में उसे अहस्तांतरणीय दर्ज करने और संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे जमीन की खरीद-बिक्री पर कानूनी रोक की स्थिति बन सकती है।
सागर में 12 कॉलोनाइजरों पर हुई कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन खरीदने वालों के लिए भी चेतावनी है। प्लॉट खरीदने से पहले कागजात, भूमि उपयोग, कॉलोनी की अनुमति और जमीन की कानूनी स्थिति की जांच करना जरूरी है। सस्ता प्लॉट मिलने के लालच में जल्दबाजी करना भविष्य में बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है।
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