“भ्रष्टाचार के महाबली” डॉ. धीरेंद्र पांडे के विरुद्ध सपाक्स का हल्लाबोल; क्या लोकायुक्त और EOW ने ओढ़ ली है चुप्पी?

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। मामला प्रदेश के रसूखदार अधिकारी डॉ. धीरेंद्र पांडे से जुड़ा है, जिनके विरुद्ध सपाक्स पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पीयूष प्रताप सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। ब्रैंडवाणी समाचार बिना किसी डर या दबाव के एक बार फिर इस भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का पर्दाफाश कर रहा है।

सपाक्स नेता पीयूष प्रताप सिंह ने लोकायुक्त और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को लिखे अपने कड़े पत्र में स्पष्ट किया है कि डॉ. पांडे के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाणित दस्तावेज सौंपे जाने के बावजूद एक साल से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि एक माह के भीतर भ्रष्टाचारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे उच्च न्यायालय में परिवाद दायर करेंगे। क्या प्रशासन जानबूझकर इन फाइलों को दबाकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहा है?

ब्रांडवाणी के पास मौजूद दस्तावेजों (नोटशीट) से यह स्पष्ट होता है कि डॉ. पांडे के कार्यकाल के दौरान वित्तीय नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं:

नियमों का उल्लंघन: वित्त विभाग के परिपत्र (6 अक्टूबर 2012) के अनुसार केवल टैक्सी कोटे में पंजीकृत वाहन ही किराए पर लिए जा सकते थे, लेकिन डॉ. पांडे के लिए निजी वाहन का उपयोग कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

फर्जीवाड़े की हद: वाहन का परमिट फरवरी 2021 में जारी हुआ, जबकि भुगतान जनवरी 2021 से ही शुरू कर दिया गया।

किलोमीटर का खेल: नियमों के विपरीत 1000 किमी की सीमा से अधिक वाहन चलाकर हजारों रुपये के अतिरिक्त बिल पास कराए गए।

वर्तमान में MPCST (मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद) विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. धीरेंद्र पांडे के विरुद्ध ब्रांडवाणी पहले भी प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कर चुका है। हैरानी की बात यह है कि जन अभियान परिषद से लेकर वर्तमान विभाग तक उनके ‘कारनामे’ जारी हैं, परंतु शासन-प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।

जनता के पैसों की लूट हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक लोकायुक्त, EOW और शासन इन गंभीर शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करते, ब्रांडवाणी अपनी लेखनी से इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट: ब्रांडवाणी, भोपाल

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Gaurav Singh

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