
सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे: आईएएस दंपति का ‘जमीन जुगाड़’ चर्चा में
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक आईएएस (IAS) दंपति का निवेश चर्चा का विषय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि इस दंपति ने ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाली कहावत को सच कर दिखाया है। मामला करोड़ों की जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा है, जिसमें शासकीय सेवा में रहते हुए अपनी बेनामी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए एक अनोखा ‘फॉर्मूला’ निकाला गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस आईएएस दंपति ने राजधानी के पॉश इलाके होशंगाबाद रोड पर लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर 9 संपत्तियां खरीदी हैं। इन संपत्तियों में कीमती कृषि भूमि (खेती की जमीन) भी शामिल है। शासकीय सेवा के नियमों और जांच के दायरे से बचने के लिए दंपति ने इन जमीनों की रजिस्ट्री अपने नाम कराने के बजाय एक बेहद शातिर रास्ता चुना।
दंपति ने इन सभी संपत्तियों की ज्वॉइंट रजिस्ट्री अपने-अपने भाइयों (पति के भाई और पत्नी के भाई) के नाम पर कराई है। इसके पीछे की मुख्य रणनीति यह है कि भविष्य में दोनों के भाई एक-दूसरे की हिस्सेदारी के कारण अकेले उस संपत्ति पर अपना दावा नहीं कर पाएंगे। इस तरह संपत्ति का पूरा नियंत्रण और सुख इस आईएएस दंपति के पास ही रहेगा, जबकि कागजों पर वे कहीं नजर नहीं आएंगे।
हैरानी की बात यह है कि इस ‘जुगाड़’ की चर्चा अब पूरे प्रशासनिक गलियारे में फैल गई है। अन्य अधिकारी भी जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए इस फॉर्मूले को अपनाने की सोच रहे हैं। शासन और भ्रष्टाचार विरोधी निकायों के लिए यह नया ‘जमीन फॉर्मूला’ एक बड़ी चुनौती बन सकता है। अब देखना यह है कि क्या यह ‘सांप और लाठी’ वाला खेल सरकारी फाइलों में कभी दर्ज हो पाता है या नहीं।
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