
झांसी: ग्राम सैयर में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी मनसा नाथ भगवान एवं बूढ़े महादेव बलखंडेश्वर धाम के पावन प्रांगण में भव्य दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था, ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खेल-कौशल के संगम ने आयोजन को खास बना दिया। अखाड़े में पहलवानों के उतरते ही दर्शकों में उत्साह बढ़ गया और पूरा परिसर तालियों एवं जयकारों से गूंज उठा।
दंगल में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, नोएडा, बांदा, हमीरपुर, ग्वालियर, बबीना, झांसी और करारी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने हिस्सा लिया। पहलवानों ने अखाड़े की मिट्टी में अपनी ताकत, फुर्ती और पारंपरिक कुश्ती के दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। मुकाबलों के दौरान पहलवानों के बीच जोरदार संघर्ष देखने को मिला, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और आसपास के ग्रामीण पहुंचे।
दंगल प्रतियोगिता में संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कुश्ती प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। उन्होंने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कुश्ती केवल शारीरिक शक्ति का खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम, साहस और आत्मविश्वास की साधना भी है। उन्होंने कहा कि अखाड़े की मिट्टी व्यक्ति को संघर्ष करना, गिरकर दोबारा उठना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगातार प्रयास करना सिखाती है।
डॉ. सरावगी ने ग्रामीण क्षेत्रों में दंगल जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं के आयोजन को लोकसंस्कृति और खेल विरासत को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती वीरता और पराक्रम के लिए जानी जाती है और यहां के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है कि उन्हें उचित मंच, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने दंगल आयोजन के लिए ग्रामवासियों और प्रधान परिवार को बधाई देते हुए पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम में श्री श्री 1008 श्री आनंद गिरि जी महाराज, बलखंडेश्वर धाम आश्रम सैयर पहाड़, श्री श्री 1008 श्री बल्लू महाराज, खाती बाबा मंदिर बिजौली, बबीना विधायक राजीव परीछा, जिला पंचायत अध्यक्ष झांसी पवन गौतम, वीरेंद्र प्रताप ‘वीरू भैया’, संजीव यादव सिमरदा, कामता प्रसाद यादव, पूर्व प्रधान सैयर, सुरेश यादव सैयर, राजगढ़ के मेहरबान सिंह यादव, नंदराम पहलवान सैयर, राजकुमार यादव ‘राजू’ प्रधान सैयर, दारा सिंह पहलवान करारी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
दंगल के दौरान दर्शकों ने रोमांचक मुकाबलों पर तालियों और जयकारों से पहलवानों का उत्साह बढ़ाया। आयोजन स्थल पर देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा। दंगल का आयोजन समस्त ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी तथा प्रधान परिवार सैयर की ओर से किया गया। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, पहलवानों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी प्रतियोगिताओं से खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है और पारंपरिक खेल एवं सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित रखने में मदद मिलती है।
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