
भोपाल ब्रांडवाणी समाचार | मध्य प्रदेश में उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए गठित ‘उद्यमिता विकास केंद्र’ सेडमैप-CEDMAP इन दिनों प्रशासनिक शुचिता को ताक पर रखकर चलाए जा रहे मनमाने सिंडिकेट के केंद्र में आ गया है। ब्रांडवाणी समाचार द्वारा पूर्व में किए गए खुलासे के बाद अब सेडमैप के गलियारों से और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कार्यपालन संचालक ED राजेंद्र सिंह द्वारा एक ही चहेती कंपनी ‘आरबी एसोसिएट्स’ को उपकृत करने की ज़िद, पूर्व में निलंबित अधिकारी की संस्था में बेरोकटोक सक्रियता, और फर्मों से कथित उगाही की फुसफुसाहट ने विभाग की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
निलंबित अधिकारी दिनेश खरे की ‘सुपर एक्टिव’ वापसी पर सवाल
सेडमैप से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संदिग्ध और अनर्गल गतिविधियों के चलते निलंबित किए जा चुके अधिकारी दिनेश खरे की भूमिका संस्था में अचानक बेहद प्रभावी हो चुकी है। नियमानुसार जिस अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही हो, उसे नीतिगत और रणनीतिक फैसलों से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन सेडमैप मुख्यालय में चर्चा है कि वे एक पूर्णकालिक और ‘पावरफुल’ अधिकारी की तरह सक्रिय होकर फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक निलंबित अधिकारी के इशारे पर संस्था के नियम-कायदों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है?
एक ही फर्म पर मेहरबानी और ₹1 लाख की कथित मांग की चर्चा
विश्वसनीय सूत्रों और प्रशासनिक हलकों में यह गंभीर चर्चा तेजी से चल रही है कि ईडी राजेंद्र सिंह द्वारा तमाम पारदर्शी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सिर्फ एक विशेष फर्म को पूरा काम सौंपने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। वहीं, वेंडर लॉबी और सेडमैप से जुड़ी एजेंसियों के बीच एक और संगीन आरोप तैर रहा है—कहा जा रहा है कि सेडमैप से जुड़े काम और फाइलों को आगे बढ़ाने के एवज में प्रत्येक फर्म से कथित तौर पर 1 लाख रुपये की अनुचित मांग की जा रही है। हालांकि यह आरोप कितना सच है और कितना निराधार, यह तो एक निष्पक्ष विजिलेंस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन ऐसी खबरों का खुलेआम चर्चा में आना ही संस्था की गिरती साख का प्रमाण है।
वल्लभ भवन के 5वें माले से किसका वरदहस्त?
सचिवालय (वल्लभ भवन) के गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर ईडी राजेंद्र सिंह और उनके करीबी सिंडिकेट को यह बेखौफ अंदाज कहां से हासिल हो रहा है? सूत्रों का दावा है कि मंत्रालय के 5वें माले पर बैठने वाले एक बेहद रसूखदार शीर्ष अधिकारी का संरक्षण इस पूरे तंत्र को मिला हुआ है। इसी कथित उच्चस्तरीय ‘अभयदान’ के चलते न तो शिकायतों की फाइलें आगे बढ़ती हैं और न ही नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियों पर कोई संज्ञान लिया जाता है।
ब्रांडवाणी समाचार के सीधे और तीखे सवाल:
- निलंबित अधिकारी का दखल क्यों? अनर्गल गतिविधियों के कारण निलंबित दिनेश खरे किस नियम के तहत सेडमैप में आज भी सक्रिय अधिकारी की तरह भूमिका निभा रहे हैं?
- फर्मों से वसूली के आरोपों का सच क्या? क्या एमएसएमई विभाग, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू फर्मों से 1 लाख रुपये की कथित मांग और वित्तीय अनियमितताओं की गोपनीय जांच कराएगा?
- वल्लभ भवन का 5वां माला मौन क्यों? सूत्रों का दावा है कि क्या मंत्रालय के 5वें फ्लोर से मिल रहे कथित संरक्षण के चलते सेडमैप को किसी निजी सिंडिकेट का चारागाह बनने की खुली छूट मिल गई है?
- क्या ऐसे चलेगी मोहन सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति? जहां राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं सेडमैप जैसी महत्वपूर्ण संस्था में यह मनमानी शासन की मंशा पर सवालिया निशान नहीं लगा रही?
संस्था की गरिमा और आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है कि इस पूरे मामले की लोकायुक्त अथवा ईओडब्ल्यू से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।






