
पुलिस महकमे में रिटायरमेंट के मौके पर विदाई संदेश तो खूब आते हैं, लेकिन पिछले दिनों एक सीनियर आईपीएस साहब की विदाई पर जो हुआ, उसने पुलिस के गलियारों में चर्चा का नया विषय दे दिया। एक महत्वपूर्ण पद से सीनियर आईपीएस के रिटायर होते ही आईपीएस एसोसिएशन के ग्रुप में एक और सीनियर अफसर ने उनकी तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए। अभी तारीफों का सिलसिला चल ही रहा था कि प्रदेश के पुलिस कप्तान साहब की एंट्री हो गई। कप्तान साहब ने लिखा कि रिटायर हो रहे आईपीएस उनकी सेवाकाल के बेहतरीन अफसरों में से एक रहे हैं। इसके बाद कप्तान साहब ने जो लाइन लिखी, उसने पूरी कहानी को ही खास बना दिया और दोनों अधिकारियों के बीच रहे पुराने संबंधों की चर्चा शुरू हो गई।
कप्तान साहब ने अपने संदेश में रिटायर हो रहे आईपीएस अधिकारी की सेवाओं और उनके काम की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि रिटायर हो रहे आईपीएस उनकी सेवाकाल के बेहतरीन अफसरों में से एक रहे हैं। लेकिन इसके बाद लिखी गई एक खास लाइन ने पूरे संदेश को और ज्यादा चर्चा में ला दिया। कप्तान साहब ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ साल से दोनों का चोली-दामन का साथ रहा। इस एक वाक्य ने विदाई संदेश को सामान्य औपचारिक संदेश से अलग बना दिया। पुलिस महकमे में दोनों के बीच लंबे समय से रहे तालमेल और साथ को लेकर भी चर्चा होने लगी। सीनियर अधिकारी की तारीफ और उनके साथ काम करने के अनुभव को कप्तान साहब ने अपने संदेश के जरिए सामने रखा।
कप्तान साहब ने आगे रिटायर हो रहे आईपीएस अधिकारी के काम की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और लगन के साथ निभाई। यानी विदाई के मौके पर उनके कार्यकाल और जिम्मेदारियों को लेकर प्रदेश के पुलिस कप्तान की ओर से सकारात्मक संदेश दिया गया। आईपीएस एसोसिएशन के ग्रुप में शुरू हुई तारीफों के बीच कप्तान साहब का संदेश आने के बाद यह पूरा घटनाक्रम पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया। करीब डेढ़ साल के साथ और काम के दौरान बने तालमेल का जिक्र करते हुए कप्तान साहब ने अपने साथी अधिकारी को सम्मान के साथ विदाई दी। अब रिटायरमेंट के बाद यह साथ भले ही औपचारिक रूप से खत्म हो गया हो, लेकिन विदाई संदेश में लिखी गई ‘चोली-दामन’ वाली बात लंबे समय तक चर्चा में रहने वाली है।
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