
बड़े जिले की कलेक्टरी संभालने के बाद युवा आईएएस अधिकारी इन दिनों लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। कलेक्टर का पद संभालने के बाद जिले में कुपोषण से लेकर बच्चों की मौत जैसे गंभीर मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई। मामला जिले की सीमा से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और विपक्ष ने भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी बीच मीडिया के सवालों और बढ़ती निगरानी के बीच कलेक्टर के सामने प्रशासनिक दबाव भी बढ़ता दिखाई दिया।
इसी दौरान प्रशासन की ओर से एक ऐसा आदेश सामने आया, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया। आदेश में सरकारी परिसर में वीडियो और रील बनाने पर रोक लगाने की बात कही गई थी। साथ ही उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। यह आदेश सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर सरकारी दफ्तरों और परिसरों में वीडियो बनाने पर इतनी सख्ती की जरूरत क्यों पड़ी। देखते ही देखते यह आदेश सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर बढ़ते सवालों के बीच प्रशासन को भी इस फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा। खबर के मुताबिक, आदेश जारी होने के कुछ ही घंटे बाद उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। अधिकारियों के बीच यह चर्चा होने लगी कि कलेक्टर के पद संभालने के बाद यह पहला बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है और आदेश वापस लेने से मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
अब पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी परिसरों में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया के दौर में सरकारी कामकाज से जुड़े वीडियो और सूचनाओं को लेकर पारदर्शिता की मांग भी लगातार बढ़ रही है। फिलहाल आदेश वापस लिए जाने के बाद मामला शांत होता दिखाई दे रहा है, लेकिन युवा कलेक्टर का यह फैसला और उसके बाद आदेश की वापसी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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