शिवपुरी में शराब के खिलाफ महिलाओं का हल्लाबोल: अमोलपठा में दुकान पर तोड़फोड़, 25 नामजद समेत 80 पर FIR; 15 गिरफ्तार

सार

रानू परिहार | शिवपुरी के करैरा अनुविभाग के अमोल क्षेत्र में शराब बिक्री के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन अब कानून-व्यवस्था के मुद्दे में बदल गया है। अमोलपठा में 10 सितंबर को लाइसेंसी शराब दुकान पर तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस-आबकारी टीम के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने 25 नामजद समेत करीब 80 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। अब तक 15 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, महिलाओं का कहना है कि शराब की बिक्री से परिवार और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है। सवाल यह है कि शराबबंदी की मांग को लेकर विरोध का अधिकार कहां तक है और दुकान में तोड़फोड़ या सरकारी अमले पर हमला होने पर कानून क्या कहता है।

विस्तार

शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग का अमोल क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से शराब दुकानों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर चर्चा में है। अमोलपठा के साथ आसपास के कुछ क्षेत्रों में महिलाओं ने शराब दुकानों के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर शराब की पेटियां बाहर निकालकर तोड़ने और शराब नष्ट करने के वीडियो भी सामने आए। थरखेड़ा में महिलाओं द्वारा शराब की पेटियां लाठियों से तोड़ने की घटना की भी रिपोर्ट सामने आई है।

सबसे गंभीर घटना 10 सितंबर को अमोलपठा में सामने आई। पुलिस के अनुसार लाइसेंसी कंपोजिट शराब दुकान पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और स्थिति बाद में उग्र हो गई। दुकान में तोड़फोड़, आगजनी, मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस-आबकारी टीम के मौके पर पहुंचने के बाद विवाद और बढ़ने की बात भी सामने आई है। मामले में पुलिस ने 25 नामजद सहित बड़ी संख्या में अन्य लोगों को आरोपी बनाया है और 15 गिरफ्तारियां की गई हैं।

महिलाओं और ग्रामीणों का पक्ष है कि क्षेत्र में शराब की बिक्री से परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शराब दुकान हटाने और क्षेत्र में शराब बिक्री बंद करने की मांग उठाई है। थरखेड़ा की घटना में भी महिलाओं ने शराब को परिवारों पर आर्थिक बोझ और घरेलू विवाद का कारण बताते हुए दुकान हटाने की मांग की थी।

वहीं पुलिस और प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि किसी समस्या को लेकर विरोध किया जा सकता है, लेकिन कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है। अमोलपठा मामले में पुलिस ने तोड़फोड़, आगजनी और शासकीय कार्य में बाधा जैसे आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। पुलिस की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना के दौरान कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष रूप से हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या शराब के खिलाफ आंदोलन करना गैरकानूनी है? इसका जवाब है नहीं। संविधान के तहत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना और प्रदर्शन करना अधिकारों के दायरे में आता है, हालांकि यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और कानून की सीमाओं के अधीन है। किसी लाइसेंसी दुकान को खुद बंद कराना, उसमें घुसकर सामान तोड़ना, शराब नष्ट करना, आग लगाना या पुलिस-अधिकारी पर हमला करना अलग कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है। इसलिए शराबबंदी की मांग और हिंसक तरीके से उसे लागू करने की कोशिश को एक ही बात नहीं माना जा सकता।

मध्यप्रदेश में शराब की बिक्री और लाइसेंस व्यवस्था आबकारी कानूनों के तहत नियंत्रित होती है। राज्य में 2026-27 की आबकारी नीति में नए शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया गया है। साथ ही नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर पांच किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानों पर रोक और अधिसूचित धार्मिक शहरों में शराब बिक्री पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान जारी रखे गए हैं।

शराब दुकान के स्थान को लेकर भी नियम हैं। मध्यप्रदेश के आबकारी नियमों में धार्मिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कन्या छात्रावासों आदि के संबंध में न्यूनतम दूरी के प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए यदि किसी विशेष दुकान के स्थान को लेकर नियम उल्लंघन का दावा है तो उसका निर्णय संबंधित आबकारी रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण के आधार पर ही किया जा सकता है।

अवैध शराब की शिकायत होने पर आम नागरिकों के लिए सही रास्ता संबंधित पुलिस थाना, आबकारी विभाग, प्रशासन और निर्धारित शिकायत व्यवस्था के माध्यम से कार्रवाई की मांग करना है। ग्रामीण चाहें तो सामूहिक रूप से लिखित शिकायत देकर दुकान के लाइसेंस, स्थान, बिक्री और कथित अवैध शराब की जांच की मांग कर सकते हैं। मध्यप्रदेश में ग्राम स्तर पर शराबबंदी की सामुदायिक पहल के उदाहरण भी सामने आ चुके हैं, जहां ग्रामसभा के जरिए स्थानीय स्तर पर निर्णय लिया गया था।

अमोलपठा की घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां एक तरफ महिलाओं की शराब विरोधी नाराजगी और दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था का सवाल आमने-सामने है। महिलाओं की शिकायतों में यदि अवैध शराब बिक्री, नियमों के उल्लंघन या सामाजिक नुकसान से जुड़े तथ्य हैं तो प्रशासन को उनकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। वहीं तोड़फोड़, आगजनी या सरकारी अमले पर हमले के आरोपों की जांच भी कानून के अनुसार होनी जरूरी है।

फिलहाल पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि घटना में कौन लोग सीधे तौर पर हिंसा, तोड़फोड़ या आगजनी में शामिल थे और शराब बिक्री को लेकर महिलाओं की शिकायतों में कितनी वास्तविकता है। दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

 

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Srota Swati Tripathy

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