
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला। न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने अदालत में हंगामा कर दिया। उसने न केवल पीठ के समक्ष कागज उछाल दिए, बल्कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा टीम ने उसे अदालत कक्ष से बाहर ले गई।
याचिकाकर्ता ने जजों को देने लगा निर्देश
सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने पीठ से कहा कि वह न्यायिक आदेश दे रहा है और लखनऊ के एसआईपी पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। इसके बाद उसने केस से जुड़े दस्तावेज अदालत की ओर उछाल दिए। इस पर न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि क्या वह अदालत को आदेश दे रहा है। जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी बात केस के दस्तावेजों में दर्ज है।
कोर्ट ने कार्रवाई से किया इनकार
घटना के बावजूद पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता मानसिक रूप से परेशान प्रतीत होता है और उसके खिलाफ तत्काल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में कोई निर्देश जारी नहीं किए जा रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है याचिका
यह मामला लखनऊ के एसआईपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग से जुड़ा था। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका था, जिसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
कोर्ट की अवमानना का बन सकता है मामला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालत में इस प्रकार का व्यवहार अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के दायरे में आ सकता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की साधारण कैद, 2,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। हालांकि, यदि आरोपी बिना शर्त लिखित या मौखिक माफी मांगता है और अदालत उसे स्वीकार कर लेती है, तो कार्रवाई से राहत मिल सकती है.
यह भी उल्लेखनीय है कि 6 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन CJI के समक्ष भी एक व्यक्ति द्वारा जूता फेंकने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद अदालत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।
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