
छात्र प्रदर्शनों के दौरान देशभर में पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है और पुलिस की ओर से कथित ज्यादती के आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि यदि किसी भी पक्ष ने कानून अपने हाथ में लिया है या अत्यधिक बल प्रयोग किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन होने भर से लाठीचार्ज या बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं प्रदर्शनकारियों को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों की जवाबदेही तय होना जरूरी है और निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।
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अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली और विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता है, ताकि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे।
विभिन्न पक्षों की दलीलों पर विचार
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मामले की अगली सुनवाई में अदालत विभिन्न पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। फिलहाल कोर्ट की टिप्पणी को छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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