
टीकमगढ़/ धर्मेंद्र सिंह लोधी: बलदेवगढ़ परियोजना अधिकारी महेश दोहरे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अभी तक अधिकारी के खिलाफ किसी नोटिस या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं परियोजना अधिकारी ने वायरल वीडियो को एडिटेड और छेड़छाड़ किया हुआ बताते हुए अपना पक्ष रखा है।
आंगनवाड़ी सहायिका की शिकायत पर पहुंचे थे अधिकारी
परियोजना अधिकारी महेश दोहरे के अनुसार, एक आंगनवाड़ी सहायिका ने कुछ दबंग लोगों से परेशान किए जाने की शिकायत की थी। इसी शिकायत की जांच के लिए वह संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे थे। उनका कहना है कि शिकायत की वास्तविक स्थिति जानने और मौके की परिस्थितियों को समझने के लिए वे वहां गए थे।
अधिकारी के मुताबिक, मौके पर कुछ लोग कथित तौर पर शराब के नशे में मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने भी तेज आवाज में विरोध किया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इसी घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वीडियो की सत्यता और उसके पूरे संदर्भ को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
परियोजना अधिकारी महेश दोहरे ने वायरल वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। उनका दावा है कि वायरल वीडियो में घटनाक्रम का पूरा हिस्सा नहीं दिखाया गया है। उनके अनुसार, वीडियो का कुछ हिस्सा काटकर या एडिट करके प्रसारित किया गया, जिससे घटना की तस्वीर अलग नजर आ रही है।
‘मेरे पास मौजूद है पूरा मूल वीडियो’
परियोजना अधिकारी ने कहा कि उनके पास घटना का पूरा मूल वीडियो मौजूद है। उनका कहना है कि यदि मूल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे वीडियो की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए तो वास्तविक घटनाक्रम सामने आ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी है। अधिकारी ने जांच में मूल वीडियो को भी शामिल किए जाने की बात कही है।
कलेक्टर पर जताया भरोसा
महेश दोहरे ने कहा कि उन्हें टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वायरल वीडियो और उनके पास मौजूद मूल वीडियो की जांच के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा।
अधिकारी का कहना है कि उनका पक्ष भी जांच के दौरान सामने रखा जाना चाहिए, ताकि घटना को एकतरफा वीडियो के आधार पर न देखा जाए।
कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं
फिलहाल प्रशासन की ओर से परियोजना अधिकारी के खिलाफ किसी नोटिस, निलंबन या अन्य कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में वायरल वीडियो को लेकर लगाए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
अब मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो वास्तविक घटनाक्रम को पूरी तरह दर्शाता है या उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग अथवा छेड़छाड़ की गई है। साथ ही यह भी सामने आएगा कि आंगनवाड़ी सहायिका की शिकायत की वास्तविक स्थिति क्या थी और मौके पर घटनाक्रम किन परिस्थितियों में हुआ।
फिलहाल मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक जांच के नतीजे का इंतजार किया जा रहा है।
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